राजघाट स्थित वसंत महिला महाविद्यालय में मंगलवार को वर्षा मंगल और कजरी महोत्सव मनाया गया। वरुणा-गंगा संगम तट पर गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की स्मृति पर सावन की हरितिमा और रिमझिम फुहारों के बीच महाविद्यालय परिसर रवींद्र संगीत और लोकगीतों की मधुर स्वरलहरियों से गुंजायमान रहा। छात्राओं ने मनमोहक समूह नृत्य से कार्यक्रम की शुरुआत की। पारंपरिक परिधानों में परिसर का पद-प्रदक्षिणा किया। छात्राओं ने पंचतत्व स्वर्णिमा (पृथ्वी) , साक्षी कोरी (जल), अग्रिमा मिश्रा (अग्नि), प्रीति कुमारी (वायु) और आश्रि स्मिता (आकाश) का प्रतिनिधित्व करते हुए कलश यात्रा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। प्राचार्य प्रो. अलका सिंह ने स्वागत वक्तव्य में कहा कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने वर्ष 1928 में शांति निकेतन में प्रकृति और वर्षा ऋतु के स्वागत के लिए वर्षा मंगल की परंपरा शुरू की थी, जिसमें उन्होंने कृषि संस्कृति और प्रकृति-प्रेम को पिरोया था। मुख्य अतिथि वन संरक्षक डॉ. रवि कुमार सिंह रहे।