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मौनी अमावस्या पर गया में कराएं तर्पण, हर तरह के ऋण से मिलेगी मुक्ति : 24 जनवरी 2020
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गुड़िया केसः ऐसी हैवानियत... निजी अंगों में डाली मोमबत्ती-कांच की बोतल, करने पड़े थे 10 ऑपरेशन

जानिए किस दरिंदगी से दोषियों ने पांच साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म किया कि उसके 10 ऑपरेशन करने पड़े...

19 जनवरी 2020

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गाजियाबाद

रविवार, 19 जनवरी 2020

गौरव चंदेल हत्याकांडः कार में मिले आरोपियों के अहम सुराग, लोगों में फैली ये अफवाह

गौरव चंदेल की कार ने बिना नंबर के पांच थाने और नौ नाके किए पार, आखिर कहां थी पुलिस

गौरव चंदेल हत्याकांड में नोएडा के बाद गाजियाबाद पुलिस ने भी की लापरवाही की हदें पार, हुए ये खुलासे

गाजियाबादः एकतरफा प्यार में बहन के देवर ने बीच सड़क पर रेता नर्स का गला, हालत गंभीर

एकतरफा प्यार में पागल बहन के देवर ने अस्पताल जा रही ट्रेनी नर्स का बीच सड़क चाकू से गला रेत दिया। शुक्रवार को कविनगर थानाक्षेत्र के संजयनगर में दिनदहाड़े हुई इस घटना से अफरातफरी मच गई। राहगीर ने लहूलुहान हुई युवती को पास केअस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी है। वहीं, घटना के दौरान गश्त कर रही पुलिस ने आरोपी को मौके पर ही दबोचकर चाकू बरामद कर लिया।

पुलिस के मुताबिक नर्स का दूसरी जगह रिश्ता तय होने से नाराज होकर आरोपी ने घटना को अंजाम दिया।मूलरूप से बागपत के बालैनी निवासी गुड्डी (26) पुत्र राकेश संजयनगर स्थित जिला संयुक्त अस्पताल में कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर (नर्स) की ट्रेनिंग कर रही है। वह संजयनगर एच-ब्लॉक निवासी अंकुर शर्मा के मकान में शामली निवासी अंजलि व मुजफ्फरनगर निवासी राखी के साथ किराए पर रहती है।

पुलिस के मुताबिक, गुड्डी शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे दोनों रूममेट के साथ ट्रेनिंग क्लास के लिए अस्पताल जा रही थी। धीरे चलने की वजह से गुड्डी दोनों रूममेट से पीछे चल रही थी। अग्रसेन भवन के पास गुड्डी की बहन के देवर सचिन निवासी जानी, मेरठ ने गुड्डी को रोक लिया और उसका मोबाइल छीनने की कोशिश की। विरोध करने पर सचिन ने चाकू निकाला और गुड्डी का गला रेत दिया।

शोर सुनकर राहगीर दौड़ पड़े, लेकिन सचिन वहीं खड़ा रहा। राहगीर अवधेश मिश्र ने आननफानन में गुड्डी को बाइक पर बैठाकर संजयनगर स्थित यशोदा अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस के मुताबिक, गला गहराई से कटा है, लिहाजा डॉक्टरों को ऑपरेशन करना पड़ा। खून ज्यादा बह जाने से उसकी हालत गंभीर बनी है।
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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

मुसीबत में न करें इंतजार, पंच से स्वयं दें जवाब

मुसीबत में न करें इंतजार, पंच से खुद दें जवाब
गाजियाबाद। मुसीबत के समय कोई आपकी मदद नहीं करता तो आपको इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। आप खुद को इतना मजबूत बनाएं कि स्वयं जवाब दें सकें। क्योंकि आज का दौर बदल चुका है। आत्मनिर्भर बनने की जरूरत है। इसी संदेश के साथ भागीरथ पब्लिक स्कूल में अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए गए। शिविर में छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और सीखा कि किस तरह जूडो-कराटे के छोटे-छोटे दांव से वह किसी भी शरारती तत्व को सबक सिखा सकती हैं। इस दौरान जूडो कोच ने तमाम टिप्स दिए।
शुक्रवार को संजयनगर सेक्टर-23 स्थिति भागीरथ पब्लिक स्कूल में छात्राओं को कराटे एसोसिएशन ऑफ गाजियाबाद के अध्यक्ष संतोष कुमार ने 200 से अधिक छात्राओं को आत्मसुरक्षा के टिप्स दिए। उन्होंने छात्राओं को मुसीबत के समय असामाजिक तत्वों से लड़ना सिखाया। इस दौरान छात्राओं को विभिन्न सुरक्षात्मक उपायों के बारे में विस्तार से बताया गया और आत्मरक्षा के टिप्स से भी अवगत कराया गया। उन्होंने बताया कि आत्मरक्षा के लिए किसी उपकरण या हथियारों की आवश्यकता नहीं है। थोड़ी सावधानी, सतर्कता और आत्मविश्वास के साथ हम किसी भी दुर्घटना से बच सकते हैं। लड़कियां किसी भी क्षेत्र में कमजोर नहीं हैं। हिम्मत, साहस और मजबूत इरादों के साथ हर कार्य करना चाहिए। हर लड़की को जूडो-कराटे आदि का प्रशिक्षण लेना चाहिए, क्योंकि हुनर किसी भी समय उनके काम आ सकता है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति रास्ते में चलने के दौरान आपसे छेड़छाड़ करता है तो ऐसी स्थिति में आपको बहुत ज्यादा अलर्ट रहने की आवश्यकता है। जब तक आप अलर्ट नहीं रहोगे, सामने वाला आप पर हमेशा हावी रहेगा। उन्होंने अभ्यास करके आत्मसुरक्षा के बारे में बताया। छात्राओें ने ट्रेनर से सुरक्षा को लेकर कई सवाल पूछे।
दौर बदल रहा है। उसके साथ लड़कियों को भी बदलने की आवश्यकता है। कोई व्यक्ति रास्ते में छेड़छाड़ करता है तो उसको मुंहतोड़ जवाब दें। - मुस्कान
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लड़कियां, लड़कों से कम नहीं हैं। कार्यक्रम में बचाव के बारे में बहुत अच्छे से बताया गया है। कोई मनचला परेशान करेगा तो आत्मविश्वास के साथ उसका डटकर मुकाबला करूंगी। - रमनीक कौर
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इस प्रशिक्षण के माध्यम से सीखने को मिला कि मुसीबत के समय हम अपनी सुरक्षा खुद कर सकें। किसी का इंतजार करेंगे, तब तक आरोपी घटना को अंजाम देकर भाग जाएगा। - निशा
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रास्ते में जाते समय हम लोगों को अलर्ट रहना चाहिए। अलर्ट रहने से कोई भी हम पर हमला करेगा तो उसके लिए तैयार रहेंगे। प्रत्येक छात्रा को कराटे आना जरूरी है। - चारू
अपराजिता
अपराजिता
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प्रदूषण हुआ कम 243 पहुं एक्यूआई

बारिश से घटा प्रदूषण, 243 पहुंचा एक्यूआई
साहिबाबाद। बारिश ने लोगों को प्रदूषण से कुछ राहत दी है। बारिश के चलते गाजियाबाद शहर का प्रदूषण स्तर रेड जोन से ऑरेंज जोन में आ गया है। शुक्रवार को शहर का एक्यूआई 243 दर्ज किया गया।
गाजियाबाद शहर का एक्यूआई पिछले कई दिनों से 300 से ऊपर बना हुआ था। दो दिन से हो रही बारिश से प्रदूषण स्तर में कमी आई है। शुक्रवार को शहर का एक्यूआई 243 पर जा पहुंचा। सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार गाजियाबाद में वसुंधरा इलाके में एक्यूआई सबसे ज्यादा 277 दर्ज किया गया। यहां पर पीएम दस का स्तर 145 रहा। जबकि पीएम 2.5 का स्तर 277 रहा। वहीं लोनी का एक्यूूआई 263 दर्ज किया गया। यहां पर पीएम दस का स्तर 147 हुआ। वहीं संजय नगर का एक्यूआई सबसे कम 229 रहा। यहां पर पीएम दस तो मानकों के अनुसार 104 दर्ज किया गया। वहीं पीएम दस का स्तर 229 रहा।
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दुकानदार के हत्यारे को आजीवन कारावास

दुकानदार की हत्या करने वाले को आजीवन कारावास
गाजियाबाद। उधारी के पैसे मांगने व शराब पीने से मना करने पर परचून कारोबारी की छुरा मारकर हत्या करने वाले अभियुक्त को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही अभियुक्त पर 12 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अनिल शर्मा ने बताया कि थाना निवाडी में इरफान ने सात जुलाई 2014 की रात 11.15 बजे रिपोर्ट दर्ज कराई। उसमें बताया कि सारा गांव में रहने वाले उसके चाचा शकील परचून की दुकान करते थे। दुकान पर गांव में ही रहने वाला नौशाद शराब पीकर आता था और गाली गलौच करता था। सामान भी उधार लेता था। शकील ने उसे सामान देने से मना कर दिया और कहा कि उसकी दुकान पर कभी भी मत आना। इसके बाद से नौशाद नाराज हो गया। सात जुलाई 2014 को नौशाद हाथ में छुरा लेकर दुकान पर आया और शकील के पेट में छुरे से वार कर दिया। शकील को घायल अवस्था में मोदीनगर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने नौशाद को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। शुक्रवार को मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए एडीजे प्रथम की कोर्ट ने सबूत और गवाहों के बयान के आधार पर नौशाद को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
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बारिश ने ठंड के साथ लोगों की बढ़ाई मुसीबत

बारिश ने ठंड के साथ बढ़ाई मुसीबत
साहिबाबाद। टीएचए में शुक्रवार सुबह हुई बारिश ने लोगों के लिए परेशानी बढ़ा दी। सुबह बारिश और ठंडी हवाओं ने जहां ठिठुरन बढ़ा दी। वहीं, बारिश से हुए जलभराव के चलते लोगों को परेशानी हुई। लोगों को पानी से होकर आना-जाना पड़ा। सुबह लिंक रोड और सीआईएसएफ रोड पर जाम का सामना करना पड़ा।
बृहस्पतिवार रात करीब ढाई बजे तक बारिश होती रही। सुबह फिर झमाझम बारिश शुरू हो गई। साथ ही ठंडी हवाओं ने ठिठुरन को बढ़ा दिया। दोपहर तक आसमान में बादल छाए रहे। करीब डेढ़ बजे बाद सूरज निकला तो ठंड से लोगों को कुछ राहत मिली। शाम को एक बार फिर ठंडी हवाओं ने लोगों को ठिठुरने पर मजबूर कर दिया। बारिश से वैशाली, वसुंधरा, इंदिरापुरम, कौशांबी, राजेंद्र नगर, श्याम पार्क, लाजपत नगर आदि में जलभराव हो गया। पानी निकासी नहीं होने की वजह से शाम तक पानी भरा रहा। लोगों को पानी से होकर आना जाना पड़ा। लोगों ने शिकायत की तो कुछ जगह पर नगर निगम की तरफ से पंपिंग मशीन भेजकर पानी निकाला गया। जिसके बाद लोगों को कुछ राहत मिली लेकिन जिन जगहों पर मशीन नहीं पहुंची वहां पर लोग दिनभर जलभराव की समस्यंा से जूझते रहे।
मुख्य सड़क पर सुबह लगा जाम
सीआईएसएफ रोड, लिंक रोड, जीटी रोड आदि पर जलभराव से जाम की समस्या उत्पन्न हो गई। जलभराव से वाहनों की स्पीड स्लो हो गई। वाहन रेंग रेंग कर चल रहे थे। वाहनों का दबाव कम हुआ तो जाम खुला। इसके बाद ट्रैफिक पुलिस और वाहन चालकों ने राहत की सांस ली।
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दरोगा पर लगाया रिश्वत मांगने का आरोप

दरोगा पर रिश्वत मांगने का आरोप, एसएसपी ने बैठाई जांच
साहिबाबाद। इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के कनावनी में रहने वाले एक युवक की पत्नी और चार माह का बेटा संदिग्ध हालात में लापता हो गए। आरोप है कि बृहस्पतिवार सुबह वह कनावनी पुलिस चौकी पर गुमशुदगी दर्ज कराने पहुंचा तो चौकी पर खुद को दरोगा बताने वाले एक युवक ने चौकी इंचार्ज के नाम पर तीन हजार रुपये रिश्वत मांगी। पीड़ित का आरोप है कि 12 सौ रुपये देने के बाद भी उनकी रिपोर्ट नहीं दर्ज हुई। एसएसपी तक मामला पहुंचने पर उन्होंने मामले की जांच एएसपी इंदिरापुरम को सौंपी है। वहीं, चौकी इंचार्ज ने आरोप को निराधार बताया है।
मूलरूप से जिला छतरपुर मध्य प्रदेश के रहने वाले रघुवीर प्रसाद कनावनी में किराए पर रहते हैं। वह राजमिस्त्री का काम करते हैं। उन्होंने बताया है कि बुधवार दोपहर को उनकी पत्नी पुष्पा चार माह के बेटे के साथ संदिग्ध हालात में लापता हो गई। उन्होंने मामले की सूचना पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने थाने पहुंचकर शिकायत देने की बात कही। आरोप है कि बृहस्पतिवार सुबह वह कनावनी पुलिस चौकी पहुंचे तो वहां एक एक युवक ने खुद को दरोगा आशीष चौधरी बताते हुए गुमशुदगी दर्ज कराने के नाम पर तीन हजार रुपये मांगे। आरोप है कि कथित दरोगा का कहना था कि यह रुपये चौकी इंचार्ज रविता चौधरी समेत सर्विलांस आदि का खर्च है। पीड़ित का आरोप है कि उन्होंने 12 सौ रुपये दे दिए। इसके बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। आरोप है कि जब वह चौकी इंचार्ज रविता चौधरी से मिले तो उन्होंने व्यस्त होने की बात कहकर भगा दिया। इसके बाद शाम को मिलने का समय दिया। शाम को रविता चौधरी को तहरीर दी। आरोप है कि रिश्वत न देने पर उनकी रिपोर्ट नहीं दर्ज गई। शुक्रवार को मामला एसएसपी कलानिधि नैथानी तक पहुंचा तो उन्होंने पूरे मामले की जांच एएसपी इंदिरापुरम केशव कुमार को सौंप दी। साथ ही दो दिन में रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
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पूर्व में ट्राले के टायर बदलने को भी आया था मामला
कुछ दिनों पहले कनावनी चौकी क्षेत्र में एक कार की ट्रक से टक्कर हो गई थी। इस पर उसने ट्रक को चौकी पर खड़ा कर दिया। आरोप है कि इस दौरान चौकी पर खड़े ट्रक के टायर बदल दिए गए। पीड़ित ट्रांसपोर्टर ने एसएसपी से मामले की शिकायत की थी। मामले की जांच सीओ साहिबाबाद डा. राकेश मिश्र को दी गई थी। उन्होंने एसएसपी को मामले की जांच रिपोर्ट भी दे दी है।
क्या कहती हैं चौकी इंचार्ज कनावनी
कनावनी चौकी इंचार्ज रविता चौधरी ने रघुवीर प्रसाद द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने कहा कि रघुवीर प्रसाद सुबह उनके पास आए थे। तब वह कोर्ट जा रही थीं। उन्होंने बताया कि शाम को चेकिंग के दौरान वह आए तो उनके पास उनकी लापता पत्नी और बेटे की फोटो नहीं थी। गुमशुदगी दर्ज करने के लिए फोटो की आवश्यकता होती है। अब तक वह फोटो लेकर नहीं आए हैं। गुमशुदगी दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उनके द्वारा किसी तरह की रिश्वत नहीं मांगी गई है। उन्होंने कहा कि उनकी चौकी पर आशीष चौधरी नाम का कोई दरोगा या सिपाही नहीं है।
क्या कहते हैं एएसपी
कनावनी पुलिस चौकी पर पीड़ित की गुमशुदगी नहीं दर्ज होने की जानकारी मिली है। साथ ही रिश्वत लेकर रिपोर्ट दर्ज करने का मामला सामने आया है। एसएसपी की ओर से मामले की जांच मिली है। पूरे मामले की जल्द से जल्द जांच कर रिपोर्ट एसएसपी को सौंप दी जाएगी। - केशव कुमार, एएसपी इंदिरापुरम।
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कार्टून कैरेक्टर बन रहे स्कूल और पैरेंट्स के लिए सिर दर्द, स्कूलों ने किया बैन

कार्टून कैरेक्टर बन रहे स्कूल और पैरेंट्स का सिर दर्द, स्कूल कर रहे हैं बैन
गाजियाबाद (शोभित शर्मा)। बच्चों के पसंदीदा कार्टून्स को स्कूल बैन कर रहे हैं। इसके लिए अभिभावकों को भी अलर्ट किया जा रहा है। स्कूलों का कहना है कि कार्टून को देखकर बच्चे बड़ों को जवाब देना, जिद करना और उनकी नकल करते हुए बात करना सीख रहे हैं। कई स्कूल अभिभावकाें को मोबाइल पर मैसेज भेजकर और बच्चों की नोटबुक में लिखकर शिनचेन को घर में बैन करने के लिए कह रहे हैं।
कार्टून्स केवल स्कूलों का ही नहीं बल्कि अभिभावकों का भी चैन लूट चुका है। आलम यह है कि कई घरों में बच्चे इस कार्टून को घंटों बैठकर लगातार देखते रहते हैं। अभिभावकों का कहना है कि कार्टून की भाषा बेहद गलत है। बच्चे घर में और स्कूलों में उसी भाषा में बात करते हैं। इस तरह की भाषा का बच्चों पर नकारात्मक असर भी पड़ रहा है और बच्चों के व्यवहार में भी बदलाव आ रहा है। इसको लेकर चिंतित कुछ स्कूलों ने अभिभावकों से साफ मना किया है कि इस कार्टून को बच्चों को न दिखाया जाए।
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स्कूल फेडरेशन ने भी जारी की है एडवाइजरी
इंडिपेंडेंट स्कूल्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की गाजियाबाद इकाई ने शिनचेन सहित कुछ और कार्टून कैरेक्टर को बैन करने के लिए एडवाइजरी जारी की है। फेडरेशन से संबद्ध करीब 120 स्कूलों में यह कहा गया है कि अभिभावक इस तरह के कार्टून कैरेक्टर को से बच्चों से दूर रखें। अध्यक्ष सुभाष जैन ने बताया कि बच्चों के पसंदीदा कार्टून कैरेक्टर को लेकर कई बार अभिभावक भी स्कूल में शिकायत करते हैं। इसके अलावा स्कूल में शिक्षकों ने बच्चों की भाषा को देखते हुए इसे बैन करने की सलाह दी है।
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क्या है परेशानी :
पूरे दिन कार्टून चैनल पर दिखाए जाने वाले कार्टून कैरेक्टर्स की भाषा में बच्चे बात करने लगे हैं। जिनमें शिक्षकों और अभिभावकों के लिए अपमानजनक भाषा भी शामिल रहती है। इसके अलावा शरारतों के साथ उनकी जिद भी बच्चों में बदलाव लाने का काम कर रही है। इन कार्टून कैरेक्टर को कई देशों में पहले ही बैन किया गया है।
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क्या कहते हैं अभिभावक
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बच्चों में कार्टून देखने से किसी की बात न मानना, अपनी मर्जी से पढ़ना जैसे बदलाव आ रहे हैं। बच्चों के स्कूल से भी इसे दिखाने के लिए मनाही की गई है।
सीमा तिवारी, अभिभावक
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पहले सप्ताह में एक ही दिन कार्टून आते थे लेकिन अब कई चैनलों में पूरे दिन कार्टून दिखाए जाते हैं। मैं अपने घर में कार्टून चैनल नहीं लगाती हूं।
डिंपल सहानी, अभिभावक
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स्कूल से ही नोटबुक पर लिखकर दिया गया है कि कार्टून बच्चों को न दिखाएं। यह बच्चों के मस्तिष्क पर बुरा असर डाल रहे हैं।
रुचि गुप्ता, अभिभावक
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कार्टून कैरेक्टर बच्चों को प्रेरणा देने वाले होने चाहिए जबकि चैनल्स ट्रेंड बदलते हुए गलत भाषा के साथ कार्टून कैरेक्टर बना रहे हैं।
शैली सेठी, अभिभावक
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क्या कहते हैं मनोचिकित्सक
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वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. संजीव त्यागी का कहना है कि एक बार की सुनने की चीज को नजरअंदाज किया जा सकता है लेकिन जो हम देख रहे हैं, उसे नजरअंदाज करना मुश्किल है। कई कार्टून कैरेक्टर बहुत शरारती हैं और सभी को परेशान करते हैं। बच्चाें को उसकी शैतानी पसंद है और बच्चे वही करने की कोशिश भी करते हैं। बच्चे कार्टून कैरेक्टर को रोल मॉडल मानकर वैसा ही करने लगते हैं। इससे बच्चों के व्यवहार में बदलाव आता है। डबिंग सही भाषा में की जाए तो काफी हद तक यह सुधर सकती है। ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि बच्चा अगर अपना पसंदीदा कार्टून देख रहा है तो उसे देखने दें लेकिन उसे समझाएं कि ये जो कर रहा है, वो कितना गलत है। कार्टून कैरेक्टर को अपना काम करने दें और अभिभावक अपना काम करें। बच्चों को सही शिक्षा चैनल नहीं अभिभावक ही दे सकते हैं।
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बेटे-परिवार और मरीजों की जिम्मेदारी को संतुलन के साथ संभालती हैं डॉ रिचा

बेटे-परिवार और मरीजों की जिम्मेदारी को संतुलन के साथ संभालती हैं डॉ. रिचा
गाजियाबाद। एक कामकाजी महिला के लिए परिवार और अपनी नौकरी को संभालना बड़ा मुश्किल होता है। यह काम और भी मुश्किल तब हो जाता है, जब पेशा ऐसा हो जहां किसी भी समय बुला लिया जाए और आने-जाने का तय समय न हो। ऐसी ही जिम्मेदारियों को बेहद ही बेहतर तरीके से निभा रही हैं स्वर्णजयंती पुरम की रहने वाली डॉ. रिचा त्रिपाठी।
एक सरकारी अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट के पद पर तैनात रिचा त्रिपाठी नौकरी के साथ-साथ न केवल अपने एक साल के बेटे की बेहतर परवरिश कर रही हैं, बल्कि ज्वाइंट फैमिली में सास-ससुर की भी सेवा करती हैं।
मूलरूप से गोरखपुर की रहने वाली डॉ. रिचा त्रिपाठी की शुरूआती शिक्षा गोरखपुर से ही हुई। सिविल इंजीनियर पिता दयाशंकर त्रिपाठी और मां नीता त्रिपाठी का सपना था कि उनकी बेटी डॉक्टर बनें। 12वीं के बाद रिचा ने कानपुर में रहकर मेडिकल परीक्षा की तैयारी की और 2005 में एमबीबीएस में दाखिला हो गया। पापा को रियल हीरो मानने वाली रिचा ने 2011 में इंटर्नशिप कर 2013 में एमडी की डिग्री पाने के लिए दाखिला लिया और तीन साल में यह डिग्री भी हासिल कर ली। एमडी पैथोलॉजी डा. रिचा त्रिपाठी के पति भी डॉ. प्रभात भारद्वाज भी बाल रोग विशेषज्ञ हैं और गाजियाबाद में उनका अपना क्लीनिक है। 2017 में गाजियाबाद में सरकार अस्पताल में जॉब मिली तो डॉ. रिचा को नई जिम्मेदारी भी मिल गई। अब वह न केवल वर्क प्लेस की बल्कि घर की भी जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही हैं। डॉ. रिचा त्रिपाठी अब घर के साथ-साथ एक साल के बेटे और सास मालती शर्मा और ससुर जगमोहन शर्मा को भी वक्त देती हैं। वह बताती हैं कि सुबह सात बजे तक घर और बच्चे का काम पूरा कर वह ड्यूटी पर निकल जाती हैं। सुबह आठ बजे से दोपहर 3 बजे तक वह अपनी अस्पताल की जिम्मेदारियों को निभाती हैं। कभी-कभी मीटिंग के चलते पांच बजे तक ऑफिस के काम में व्यस्त रहती हैं, लेकिन शाम के समय को वह पूरी तरह अपने परिवार और बच्चे को समर्पित कर देती हैं। जितना वह सहयोग करती हैं उतना ही सहयोग उनका परिवार और अधिकारियों का भी मिलता है।
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अब बिल्डरों को ईडब्ल्यूएस भवनों के लिए खोलना होगा अलग खाता

ईडब्ल्यूएस मकानों के लिए अलग खाता खोलेंगे बिल्डर
गाजियाबाद। अब ईडब्ल्यूएस फ्लैटों के प्रोजेक्ट लेट नहीं होंगे। बिल्डरों को इसके लिए अलग खाता खोलना होगा। खाते में खाते से रकम का इस्तेमाल सिर्फ ईडब्ल्यूएस भवनों को बनाने पर ही किया जाएगा। यही नहीं अब बिना ईडब्ल्यूएस भवन बनाए बिल्डरों को उनके प्रोजेक्ट का आंशिक या पूर्णत प्रमाण पत्र जारी नहीं करेगा।
शहर में अधिकांश बिल्डरों ने अपने एलआईजी और एमआईजी फ्लैटों का निर्माण तो कर लिया है, लेकिन तय मानकों के मुताबिक 10 फीसदी ईडब्ल्यूएस भवनों का निर्माण नहीं किया है। जीडीए वीसी ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई है। अब उन्होंने ईडब्ल्यूएस भवनों के निर्माण को लेकर बिल्डरों के लिए एस्क्रो खाता खोलना अनिवार्य कर दिया है। इस खाते में ईडब्ल्यूएस भवनों के निर्माण पर आने वाले खर्च की रकम जमा कराई जाएगी। बिल्डरों को इस रकम को प्रोजेक्ट के अन्य हिस्से पर खर्च करने की अनुमति नहीं होगी। जीडीए अधिकारियों का कहना है कि बिना ईडब्ल्यूएस भवनों को बनाए बिल्डरों को किसी भी सूरत में कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा। जीडीए उपाध्यक्ष कंचन वर्मा का कहना है कि बिल्डर को प्रोजेक्ट शुरू करने के दौरान ही बताना होगा कि वह ईडब्ल्यूएस भवन बनाएगा या शेल्टर फीस जमा कराएगा।
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ओएलएक्स पर कार बिक्री का झांसा दे इंजीनियर से १.६५ लाख ठगे

ओएलएक्स पर कार बिक्री का झांसा दे इंजीनियर से ठगे 1.65 लाख
गाजियाबाद। ओएलएक्स पर सेकेंड हैंड कार खरीदने की कोशिश करना सॉफ्टवेयर इंजीनियर को भारी पड़ गया। साइबर ठग ने खुद को सीआईएसएफ जवान बताकर अलग-अलग बहानों से 1.65 लाख रुपये ठग लिए। आरोपी द्वारा और रुपये मांगने पर पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ। पीड़ित ने एसएसपी से कार्रवाई की गुहार लगाई, इसके बाद कोतवाली पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
मॉडल टाउन वेस्ट निवासी परितोष द्विवेदी का कहना है कि उन्होंने 22 जून 2019 को ओएलएक्स पर स्विफ्ट डिजायर कार की बिक्री का विज्ञापन देखा था। उस पर लिखे नंबर पर कॉल करने पर सामने वाले व्यक्ति ने खुद को लखनऊ एयरपोर्ट पर तैनात सीआईएसएफ जवान नवीन सिंह तोमर बताया। आरोपी ने बात होने के बाद अपना आईकार्ड समेत अन्य दस्तावेज व कार की फोटो वॉट्सएप पर भेज दीं। आरोपी ने कार को अपने मामा की कार बताते हुए ट्रांसफर के कारण जल्द बेचने की बात कही। पीड़ित का कहना है कि एयरपोर्ट ट्रांसपोर्ट सर्विस के जरिये कार भेजने की बात कहते हुए आरोपी ने आउटपास के नाम पर 7100 रुपये मांगे। रुपये देने के बाद दूसरे युवक ने कोरियर कंपनी से बताकर डिलीवरी के नाम पर 26 हजार रुपये खाते में मंगवाए। इसी तरह अन्य बहानों से भी उन्होंने 1.65 लाख रुपये ऐंठ लिए। अंत में आरोपी कार की पूरी कीमत भेजने की बात कहने लगे तो उन्हें ठगी का अहसास हुआ।
जवान का आइकार्ड प्रयोग कर रहे आरोपी
पीड़ित परितोष द्विवेदी का कहना है कि ठगी के बाद वह देहरादून में सीआईएसएफ के आईजी कार्यालय पहुंचे। पता चला कि जवान नवीन सिंह तोमर का आईकार्ड और अन्य दस्तावेज गुम हो गए थे। इस संबंध में जवान ने पिछली साल मेरठ में एफआईआर भी दर्ज कराई थी।
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