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एक ही गांव में दो सौ प्रवासी मजदूर बेकाम

नरैनी। महानगरों से लौटे प्रवासी मजदूरों को स्थानीय प्रशासन मनरेगा जैसी योजनाओं में एक माह बाद भी काम नहीं दे सका। उनके हाथ खाली हैं। ये लोग रोजगार की तलाश में महानगरों को गए थे। महामारी ने उन्हें वापस घर ला दिया। ऐसे में इन युवाओं को दोहरा सदमा है।
नरैनी तहसील के नसेनी गांव में लगभग 200 युवक दिल्ली, मुंबई, सूरत आदि महानगरों से लौटकर आए हैं। इन्हें आए हुए एक माह बीत गया। यहां ढेला भर काम नहीं मिला। परिवार उनका बमुश्किल खर्च उठा रहा है। कई युवा महानगरों में कर्जदार हो गए थे। उन्हें उनका कर्ज वापस करने की भी चिंता सता रही है।
गांव के लल्लूराम पुत्र कोदू और रामस्वरूप पुत्र हनुमान ने बताया कि उन्हें मनरेगा का जॉबकार्ड दिया गया है, लेकिन काम नहीं दिया। बेरोजगार रहकर गुजारा नहीं हो सकता। उधर, महिला ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि जमील अहमद का कहना था कि महानगरों से लौटे प्रवासी मजदूरों ने यहां काम की मांग नहीं की है। मनरेगा कार्य चल रहे हैं। जो चाहेगा उस मजदूर को काम दिया जाएगा।
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घर वापसी के बाद भी झेल रहे बेरोजगारी का दंश

बांदा। रोजी-रोटी की तलाश में महानगरों के लिए पलायन सिर्फ गांव के बेरोजगारों ने ही नहीं किया। काम के जुगाड़ में शहरी भी अपना घर छोड़कर परदेस कूचकर गए थे। लॉकडाउन हुआ तो उन पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। शुरुआत में तो यह सोचकर रुक गए कि कुछ दिन बाद हालात सामान्य हो जाएंगे, लेकिन स्थिति जब और खराब हुई तो उन्हें अपना शहर और घर याद आया।
कोई वाहनों का जुगाड़ कर तो कोई पैदल ही चल पड़ा। रास्ते में जो वाहन मिला उसी पर सवार हो लिए। कहीं खाने को मिला तो खा लिए, नहीं तो ऐसे ही चल पड़े। ऐसे ही कुछ शहरी पलायित मजदूर लॉकडाउन की मार सहकर यहां लौटे हैं। उन पर क्या बीती? शहरी प्रवासी मजदूरों की कहानी, उन्हीं की जुबानी।
आधी रोटी खाएंगे, परदेस कमाने नहीं जाएंगे
बांदा। मां ने पैसा न भेजा होता तो भूखे ही मर जाते। बाबा की यह नसीहत रह-रहकर याद आती रही कि- ‘आधी रोटी खाएंगे, परदेस कमाने नहीं जाएंगे’।
यह दर्द सूरत से लौटे बांदा शहर के अतर्रा चुंगी निवासी सुशील कुमार ने बयां किया। सुशील कुमार सूरत स्थित साड़ी की फैक्ट्री में काम करता था। उसने बताया कि फैक्ट्री बंद होने के बाद 27 अप्रैल को किसी तरह जुगाड़ कर यहां घर लौट आया। फिलहाल यहां भी अभी कोई रोजी-रोटी का जुगाड़ नहीं लग सका है, लेकिन दोबारा परदेस जाने से तोबा कर ली है।
शादी में मिली अंगूठी बेचकर वतन वापस आए
शहर के आजाद नगर का फयाजुल हसन मुंबई में रेडीमेड कपड़े बनाने वाली कंपनी में काम करता था। लॉकडाउन में फैक्ट्री बंद हुई तो हालात बिगड़ गए। बताया कि खाने के लाले पड़ गए।
उधर, बांदा में रह रही पत्नी अंजुम आए दिन फोन पर उसके हालात सुनकर रोती थी। बताया कि वापस लौटने के लिए किराया भी नहीं था। ऐसे में उसने अपनी शादी में मिली सोने की अंगूठी औने-पौने दामों में बेचकर किराया जुटा और 27 अप्रैल को बांदा आ गया। फिलहाल यहां बेरोजगार है। आगे क्या होता है देखा जाएगा।
काम के साथ कंपनी ने कमरा भी छीना
शहर के अलीगंज निवासी गोविंद सिंह पिछले वर्ष सितंबर से बंगलूरू में शटरिंग का काम कर रहा था। लॉकडाउन में कंपनी बंद होने पर बची पूंजी से कुछ दिन खर्च चला। कंपनी ने रहने को दिया कमरा खाली करा लिया। इस बीच सात हजार का कर्ज चढ़ गया।
बांदा से पत्नी ने 9 हजार रुपये भेजे तो 7 हजार कर्ज अदा किया और दो हजार रुपये लेकर वापस चल पड़ा। तीन दिन पैदल चलना पड़ा। फिर भी ट्रक आदि में बांदा आया। गोविंद को यहां भी कोई काम नहीं मिला है, लेकिन अब वह पलायन नहीं करेगा।
फयाजुल।
फयाजुल।- फोटो : BANDA
ोविंद सिंह।
ोविंद सिंह।- फोटो : BANDA
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आठ माह बाद खत्म हुआ विधवा का अनशन

बांदा। पैतृक मकान और जमीन में रिश्ते के जेठ द्वारा दबंगईपूर्वक कब्जा कर लेने के घरेलू विवाद में पिछले करीब 8 माह से यहां मंडल मुख्यालय के स्वतंत्रता स्मारक अशोक लाट में न्याय की मांग लेकर अनशन पर बैठी विधवा सुधा सिंह की सुध मंडलायुक्त के हस्तक्षेप के बाद मौदहा (हमीरपुर) प्रशासन ने ली है।
शुक्रवार को मौदहा के नायब तहसीलदार दिवाकर मिश्रा और लेखपाल आदित्य द्विवेदी अनशन स्थल आए और विधवा तथा उसके पुत्र को भरोसा दिलाया कि पैतृक मकान व जमीन में उसे हिस्सा दिलाया जाएगा।
नायब तहसीलदार ने यह भरोसा यहां सिटी मजिस्ट्रेट सुरेंद्र सिंह के समक्ष भी दिलाया। इस पर विधवा और उसके बेटे ने अनशन खत्म कर दिया और नायब तहसीलदार व लेखपाल के साथ उन्हीं के वाहन पर अपने पैतृक गांव रूरीपारा (हमीरपुर) रवाना हो गए।
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लॉकडाउन में सब गंवाया, 900 रुपए में घर आया

संजय कुमार संजय कुमार

सड़कों पर देखी प्रवासियों ने भूख, बेबसी और लाचारी

एप्प द्वारा --------- बांदा। बोरीवली (महाराष्ट्र) से अपने गृह जनपद बांदा पहुंचे प्रवासियों ने 16 दिनों के सफर में भूख, बेबसी, लाचारी देखने को मिला। बड़ागांव और पैलानी के शिवप्रसाद, रामआसरे, देवीदयाल और संजय रैदास बताते हैं हर जगह उन्होंने मदद मांगी। आगरा एक्सप्रेस-वे में सड़क हादसे में घायल प्रवासियों को सुरक्षित निकालने के लिए की मदद में पीछे नहीं रहे। - प्रवासी मजदूरों की कहानी उन्हीं की ज़ुबानी।------------------ फोटो- शिवप्रसाद - पैलानी के शिवप्रसाद ने बताया कि घर लौटने के लिए उन्हें हर वो काम करना पड़े, जिसके लिए कभी सोंचा नही था। लॉकडाउन में एसी फैक्ट्री बंद होने पर मालिक ने तनख्वाह नहीं दी। शिवाजी नगर में पड़ोसियों से भीख की तरह मदद मांगकर 1600 रुपए जुटाए। तब घर वापसी की हिम्मत आई। ... और पढ़ें

271 नमूनों की रिपोर्ट आना बाकी, लेटलतीफ रिपोर्ट से प्रधानाचार्य खफा

बांदा। राजकीय मेडिकल कालेज और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच के लिए पिछले 3 दिनों में भेजे गए कुल 271 नमूने झांसी लैब में लंबित हैं। मुंबई से परिवार के साथ लौट रहे प्रवासी मजदूर के शव के सैंपल की भी रिपोर्ट 48 घण्टे में प्राप्त नहीं हो सकी। इस पर मेडिकल कालेज प्रधानाचार्य ने असंतोष व्यक्त किया है।
शनिवार तक मेडिकल कालेज से 24 और नरैनी सीएचसी से 247 संदिग्धों के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। इन सभी की रिपोर्ट आना बाकी है। इन सैम्पलों में 28 को भेजे गए मृतक प्रवासी रविंद्र कुमार के शव का भी सैम्पल शामिल है। प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश यादव ने झांसी लैब से देरी से प्राप्त हो रहीं रिपोर्ट पर असंतोष व्यक्त किया है।
कहा है कि इससे क्वारन्टीन और आइसोलेशन में भर्ती मरीजों का इलाज/डिस्चार्ज प्रभावित हो रहा है। उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर इससे अवगत कराया गया है। उधर, मेडिकल कालेज के आइसोलेशन वार्ड में शनिवार को 35 मरीज भर्ती हैं। इनमें सबसे ज्यादा 20 सक्रिय संक्रमित चित्रकूट जिले के हैं। महोबा के 6, हमीरपुर के 4 व बाँदा में एक सक्रिय संक्रमित हैं।
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धूम्रपान और तंबाकू से हर माह एक लाख मौतें

बांदा। तंबाकू का सेवन करने वाले अपने जीवन से खिलवाड़ करने के साथ ही घर की पूंजी इलाज में फूंक देते है। बीड़ी, सिगरेट और अन्य तंबाकू के इस्तेमाल में देश में लगभग हर माह लगभग एक लाख लोगों की मौत होती है यानी तीन हजार लोग हर दिन मर रहे हैं।
राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी डॉ. एमसी पाल ने कहा कि तंबाकू की लत छुड़ाने के लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग व अन्य संस्थाएं लोगों को जागरूक कर रही हैं। जिला अस्पताल के कक्ष संख्या 4 में तंबाकू उन्मूलन केंद्र बनाया गया है।
नशा छोड़ने के इच्छुक लोग इसकी मदद ले सकते हैं। काउंसलर द्वारा कांउसिंलिंग और दवाइयों की मदद से नशे की लत छुड़ाने में मदद की जाती है। स्टेट टोबैको कंट्रोल सेल सदस्य डॉ. सूर्यकांत के हवाले से बताया कि युवा वर्ग शुरू में महज दिखावे के चक्कर में सिगरेट व तंबाकू की गिरफ्त में आता है। यह लत उसे इतना जकड़ लेती है कि उससे छुटकारा मुश्किल हो जाता है।
किसी भी रूप में तंबाकू का इस्तेमाल करने वालों को करीब 40 तरह के कैंसर और 25 तरह की अन्य गंभीर बीमारियाें का खतरा रहता है। प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। संक्रामक बीमारियों की चपेट में आने का डर रहता है। धूम्रपान से निकलने वाला 30 फीसदी धुंआ फेफड़ों तक पहुंच जाता है। शेष 70 फीसदी बाहर निकलने वाला धुंआ उन लोगों को प्रभावित करता है जो लोग धूम्रपान नहीं करते हैं। धूम्रपान से तमाम युवक नपुंसकता के शिकार हो रहे है।
बढ़ रहे हैं तंबाकू का सेवन करने वाले
वैश्विक वयस्क तंबाकू सर्वेक्षण- 2, (2016-17) के आंकडे़ बताते हैं कि तंबाकू सेवन करने वालों का आंकड़ा हर साल बढ़ रहा है। 10 साल पहले 2009-10 में प्रदेश में गुटखा व अन्य तंबाकू का इस्तेमाल करने वालों का आंकड़ा 33.9 फीसदी था। अब यह बढ़कर 35.5 प्रतिशत हो गया है।
अलबत्ता धूम्रपान करने वालों की तादाद में मामूली गिरावट आई है। एक दशक पूर्व 14.9 फीसदी आबादी धूम्रपान करती थी। अब यह 13.5 फीसदी हो गई है। खैनी व धुआं रहित अन्य तंबाकू इस्तेमाल करने वालों की तादाद 25.3 फीसदी बढ़कर 29.4 फीसदी हो गई है।
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प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर दे सकते हैं महामारी को मात

बांदा। तमाम फ्लू की तरह कोरोना वायरस भी उन लोगों को ज्यादा प्रभावित करता है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी कमजोर होती है। इम्युनिटी बढ़ाने का कोई जादुई फार्मूला नहीं है। लेकिन नियमित तौर पर कुछ कुदरती उपाय आजमाकर इसे बढ़ाया जा सकता है। इससे कोरोना और अन्य बीमारियों से बचाव में मदद मिलेगी।
बांदा शहर के बलखंडी नाका निवासी और डॉ. राममनोहर लोहिया इंस्ट्टीयूट ऑफ मेडिकल साइंस, लखनऊ की आहार विशेषज्ञ (डायटिशियन) पोयम द्विवेदी का कहना है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में रोजमर्रा की जीवन शैली की विशेष भूमिका है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण सुबह जल्दी उठना है।
गर्मियों में सुबह 5 से 6 बजे के बीच और सर्दियों में 6 से 7 बजे के बीच बिस्तर छोड़ देना चाहिए, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आधी अधूरी नींद लें। रोजाना कम से कम 7 घंटे और अधिकतम 8 घंटे की नींद जरूरी है। कम नींद लेने से शरीर में कॉर्टिसोल नामक हार्मोन के लेवल में बढ़ोत्तरी होती है। यह हार्मोन तनाव बढ़ाने के साथ इम्युनिटी सिस्टम को कमजोर करता है।
डायटिशियन पोयम ने बताया कि सुबह वॉकिंग और कसरत, मालिश आदि से भी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर कोरोना वायरस जैसे फ्लू से बचाव किया जा सकता है। सुबह 20 से 30 मिनट धूप लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इम्युनिटी बढ़ाने में मेटाबॉलिज्म का महत्व होता है। इसके लिए सुबह का नाश्ता जरूरी है। 4-4 घंटे के अंतराल में कुछ हेल्दी (पौष्टिक) खाना भी जरूरी है।
खाने में रोजाना दही या मट्ठा अथवा दूध-पनीर भी शामिल करें। इससे गुड बैक्टीरिया बीमार होने से बचाएंगे। अदरक, लहसुन, खट्टे फल से विटामिन सी मिलेगा। यह प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगा। पानी भी खूब पीयें। इससे शरीर के टॉक्सिंस बाहर निकलेंगे और संक्रमण से बचाव होगा। रोजाना एक या दो बार तुलसी अथवा शहद पीने की आदत भी बनानी चाहिए। ग्रीन टी भी पी सकते हैं।
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स्ंाघ का पैसा बांटने पर अधिवक्ताओं ने खोला मोर्चा

अतर्रा। शपथ ग्रहण हुए बगैर तहसील अधिवक्ता संघ का पैसा कुछ अधिवक्ताओं को बांटने पर लगभग दो दर्जन अधिवक्ताओं ने सामूहिक हस्ताक्षरों से एल्डर्स कमेटी अध्यक्ष और बार काउंसिल अध्यक्ष उत्तर प्रदेश से शिकायत की है। दूसरी तरफ संघ अध्यक्ष ने कहा है कि लॉकडाउन में परेशान कुछ गरीब अधिवक्ताओं की मदद की गई है।
राज्य विधिक परिषद, उत्तर प्रदेश, इलाहाबाद अध्यक्ष/सचिव को भेजे शिकायती पत्र में अधिवक्ताओं ने कहा है कि संघ का वार्षिक चुनाव 18 मार्च को हुआ था। लॉकडाउन हो जाने से अब तक शपथ ग्रहण नहीं हो पाया, लेकिन निवर्तमान अध्यक्ष और सचिव ने बिना आम सभा में प्रस्ताव के संघ के खाते से पैसा निकालकर मनमानी तरीके से अपने कुछ खास चहेते अधिवक्ताओं को अपने घर बुलाकर रुपये बांटे, जबकि अन्य अधिवक्ताओं को कोई आर्थिक मदद नहीं दी गई।
आरोप लगाया कि संघ के पैसे को बर्बाद किया जा रहा है। इसकी शिकायत की अनदेखी की जा रही है। शिकायत करने वाले अधिवक्ताओं में जितेंद्र कुमार तिवारी, लवकुश मिश्रा, हरिशंकर तिवारी, कृष्ण कुमार, अर्जुन प्रकाश गुप्ता, दिनेश, भोला प्रसाद द्विवेदी, महेंद्र गुप्ता, अवनीश तिवारी, राजकुमार पाठक आदि शािमल है।
उधर, निवर्तमान अध्यक्ष अमर सिंह राठौर का कहना है कि लॉकडाउन में परेशान गरीब 50 अधिवक्ताओं को 90 हजार रुपये की मदद दी गई है। इसके अलावा अन्य लोगों के सहयोग से जरूरतमंद अधिवक्ताओं को 25 किलो गेहूं उपलब्ध कराया गया। अध्यक्ष ने कहा कि आरोप निराधार हैं।
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निर्माणाधीन एक्सप्रेस-वे में युवती के साथ तीन ने किया रेप

अतर्रा/ओरन। अनुसूचित जाति की 18 वर्षीय युवती को निर्माणाधीन बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे में सुनसान स्थान पर ले जाकर तीन युवकों ने दुष्कर्म किया। तीनों दिनों तक यह मामला पंचायत और सुलह समझौते पर अटका रहा। बात न बनने पर शनिवार को युवती ने पिता के साथ थाने आकर तहरीर दी।
थाना क्षेत्र के एक गांव की युवती ने बताया कि तीन दिन पूर्व पड़ोसी यादव बिरादरी का युवक शाम को उसे शादी का झांसी देकर और बहला फुसलाकर गांव के बाहर निर्माणाधीन बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के सुनसान इलाके में ले गया। वहां उसके दो साथी पहले से मौजूद थे।
तीनों ने उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। उसकी हालत बिगड़ने पर धौंस धमकी देकर भाग निकले। युवती ने घर आकर माता पिता को घटना बताई। इधर, आरोपियाें और युवती पक्ष के लोगों के बीच तनाव की स्थिति हो गई। ग्राम प्रधान की पहल पर पंचायत हुई और आरोपी युवक के साथ युवती की शादी की बात कही गई, लेकिन बात नहीं बन पाई।
पिता का आरोप है कि शादी का झांसा देकर करीब एक साल से दुष्कर्म कर रहा था। पिता ने आरोपियों से खतरा जताया है। अब तक रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है। इंस्पेक्टर रवींद्र तिवारी ने बताया कि जांच की जा रही है। इसके बाद रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
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हर ब्लाक में 10 हजार प्रवासी मजदूरों को मिले काम

बांदा। डीएम अमित सिंह बंसल ने कहा है कि महानगरों से लौटे प्रवासी मजदूरों को क्वारंटीन अवधि पूरी होने पर शीघ्र रोजगार मुहैया कराया जाए। यह सुनिश्चित हो कि हरेक विकास खंड में कम से कम 10 हजार मजदूरों को मजदूरी मिले। हर ब्लाक में 5 से 7 चारागाह, नदी-नालों की खुदाई, सफाई और लॉकडाउन का पालन सख्ती से कराने के भी निर्देश दिए हैं।
शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में डीएम ने मनरेगा की समीक्षा में कहा कि इसमें प्रवासी मजदूरों को ज्यादा से ज्यादा काम दिया जाए। चारागाहों में पशुओं के चारे की व्यवस्था हो। उपायुक्त मनरेगा को निर्देश दिए कि झांसी जाकर ग्रीष्म ऋतु में पैदा किए जाने वाले चारे की जानकारी प्राप्त करें और यहां हरेक विकास खंड में 5 से 7 चारागाह सुनिश्चित कराएं।
खंड विकास अधिकारियों से कहा कि अपने कामों की प्राथमिकता खुद तय करें। नालों की खुदाई, सफाई और लेवल के लिए एक हफ्ते में कार्य योजना बनाकर पेश करने के निर्देश उपायुक्त मनरेगा को दिए।
जल निगम 16वीं शाखा को निर्देश दिया कि रिबोर वाले हैंडपंपों की रिपोर्ट 48 घंटे के अंदर उपलब्ध कराएं। ग्रामीण क्षेत्रों में डीपीआरओ व बीडीओ और नगर निकायों में सिटी मजिस्ट्रेट व ईओ रिबोरिंग सुनिश्चित करेंगे। निर्देश दिया कि यह काम दो दिन में कराया जाएं।
डीएम ने सभी एसडीएम को निर्देश दिया कि लॉकडाउन में निर्धारित समय सुबह 9 से शाम 5 बजे तक ही दुकानें खुले। साप्ताहिक बंदी में दुकान खोलने वालों पर कार्रवाई करें। सीएमओ को निर्देश दिए कि होम क्वारंटीन घरों में पोस्टर जरूर चस्पा किया जाए। ट्ड्डिी दल से सतर्क रहने और इनके आक्रमण पर कीटनाशक दवाओं के छिड़काव को कहा।
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जिले के 1342 हैंडपंप ठप, रिबोर का काम अटका

बांदा। ग्रामीण क्षेत्रों में रिबोर के लिए चिह्नित किए 1342 हैंडपंपों में जल निगम ने अब तक सिर्फ 26 का ही रिबोर किया है। उधर, गर्मी पूरे परवान पर है। प्रभावित इलाकों में पेयजल संकट है। उधर, जल निगम अधिशासी अभियंता ने रिबोर की गेंद की ग्राम पंचायतों के पाले में डाल दी है। कहा है कि जल निगम सिर्फ सत्यापन करेगा।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 2,88,979 स्थापित हैंडपंपों में 9170 खराब पड़े हैं। 1489 हैंडपंप करीब साल भर से रिबोर की आस में ठप पड़े हैं। इसके अलावा 7,681 हैंडपंप मामूली खराबी के चलते पानी नहीं दे रहे। बबेरू ब्लाक में सर्वाधिक 1235 हैंडपंप खराब हैं। इनमें 176 का रिबोर होना है। बड़ोखर ब्लाक में 1025 में 96, बिसंडा में 820 में 168 रिबोर का इंतजार कर रहे हैं।
कमासिन में 1095 में 223 का रिबोर होना है। महुआ में 1319 में 269, जसपुरा में 561 में 103, नरैनी में 1262 में 212 और तिंदवारी में 1853 में 240 हैंडपंप रिबोर होने है। जल संस्थान के 114 हैंडपंपों के रिबोर होना है। इन हैंडपंपों की सूची जिला पंचायत राज विभाग ने अप्रैल माह में जल निगम को भेज दी थी। निगम ने सिर्फ 26 हैंडपंपों का ही रिबोर किया है। उधर, जल निगम के अधिशासी अभिंयता गौरव चौधरी ने रिबोर की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों पर बताई है। उनका कहना है जल निगम का काम सत्यापन करना है। रिबोर ग्राम पंचायतों को कराना है।
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वन दरोगा की बेटी फांसी के फंदे पर झूली

बांदा। वन दरोगा की किशोर उम्र बेटी ने दुपट्टे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह हाईस्कूल की छात्रा थी। परिजन आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं कर सके। पुलिस का कहना है कि जांच की जा रही है।
शहर कोतवाली क्षेत्र के नवाब टैंक नर्सरी में रह रहे वन दरोगा रामबहोरी की 14 वर्षीय बेटी नेहा ने शुक्रवार की रात अपने कमरे में सीलिंग हुक में दुपट्टा बांधकर फांसी लगा ली। शनिवार को सुबह परिजनों ने शव फंदे पर लटका देखा। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है।
पिता ने बताया कि नेहा को किसी प्रकार का कोई कष्ट नहीं था। सुसाइड नोट भी नहीं मिला। घर के सभी सदस्य इस घटना से हतप्रभ हैं। वह इस वर्ष 10वीं क्लास में थी। उधर, अलीगंज चौकी प्रभारी ओपी द्विवेदी का कहना है कि घटनास्थल का निरीक्षण कर परिजनों से पूछताछ की गई है। प्रथम दृष्टया आत्महत्या का मामला है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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