कानपुर इनकम टैक्स बार एसोसिएशन की ओर से मंगलवार को सिविल लाइंस स्थित सभागार में जीएसटी और ई-वे बिल विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि एलपीजी, केरोसिन ऑयल, डाक टिकट, ज्वैलरी, कीमती नग, व्यक्तिगत उपयोग के लिए घरेलू वस्तुएं और करेंसी के परिवहन में ई-वे बिल जनरेट करने से छूट दी गई है। मोटर वाहन के अतिरिक्त यदि माल का परिवहन पशुओं अथवा मनुष्यों द्वारा किया जा रहा है तो ई-वे बिल जनरेट करना आवश्यक नहीं है। मुख्य वक्ता, कर विशेषज्ञ संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि किसी ट्रांसपोर्टर के पास यदि कई व्यापारियों का माल है और सभी माल का कुल मूल्य 50 हजार से अधिक है तो कंसोलिडेटेड ई-वे बिल जनरेट किया जा सकता है। जिसमें सभी व्यापारियों के माल का विवरण अंकित किया जाता है। उन्होंने कहा कि केवल ई-वे बिल की समय-सीमा समाप्त हो जाने मात्र से माल को रोककर अर्थदंड जमा कराया जाना उचित नहीं है। विशेषकर तब जबकि कर चोरी की कोई मंशा न हो। ई-वे बिल में लिपिकीय एवं तकनीकी त्रुटियों के कारण भी न्यायालयों द्वारा माल को रोके जाने और अर्थदंड जमा कराए जाने को उचित नहीं माना है। जीएसटी विभाग द्वारा भी छोटी-मोटी त्रुटियों के कारण माल रोके जाने की स्थिति में केवल एक हजार रुपये जमा कराकर माल को मुक्त किए जाने के संबंध में निर्देश जारी किया गया है। इसके बावजूद कई बार सचल दल के अधिकारियों द्वारा इन नियमों की अनदेखी करते हुए माल को रोका जाता है और व्यापारियों से जबरन अर्थदंड जमा कराया जाता है। अध्यक्ष सीए राजीव कुमार गुप्ता ने कहा कि जिन मामलों में माल के साथ ई-इनवॉइस पोर्टल से इनवॉइस जनरेट की जा रही है। उन मामलों में ई-वे बिल जनरेट करने की व्यवस्था समाप्त करना व्यापारियों के हित में होगा। ई-इनवॉइस पोर्टल से जनरेट होने वाले समस्त आंकड़े विभाग के पास पहले से उपलब्ध रहते हैं। इस मौके पर आशीष जौहरी, शैलेंद्र सचान, दीप कुमार मिश्रा, जगदीश साहू, परवीन भार्गव, पवन गुप्ता, प्रदीप मिश्रा, दिनेश शुक्ला, प्रदीप कुमार, अवनीश मिश्रा आदि थे।