विकास कार्यों का श्रेय लेने की होड़ में शामिल माननीयों के लिए शिलापट्ट छोटा पड़ रहा है। उनका नाम नहीं चमक पा रहा। विधान परिषद सदस्यों की आपत्तियां सदन में गूंजी तो शनिवार को नियम पुनरीक्षण समिति ने सर्किट हाउस में अफसरों पर सवालों की बौछार कर दी। फिरोजाबाद और आगरा की समीक्षा करने आए सभापति को अधिकारियों ने बताया कि 2025 के नियमों के तहत शिलापट्ट तैयार किए जा रहे हैं। विधान परिषद की नियम पुनरीक्षण समिति के सभापति हरिओम पांडेय ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता से शिलापट्ट पर जवाब-तलब किया। पूछा कि क्या क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधियों के नाम लिखे जा रहे हैं। अधिशासी अभियंता राघवेंद्र सिंह वर्मा ने बताया कि क्षेत्रीय विधायक के साथ विधान परिषद सदस्यों के नाम भी लिखवाए जा रहे हैं। सभापति ने कहा फिर आपत्ति क्यों आ रही है। जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने जवाब दिया कि 2025 से पहले के नियम अलग थे। तब विधान परिषद सदस्य का नाम नहीं लिखा जाता था। जिलाधिकारी ने बताया कि शिलापट्ट पर किसी भी अधिकारी का नाम प्रतिबंधित है। सभापति ने कार्य क्षेत्र में आने वाले सभी जनप्रतिनिधियों का नाम लिखे जाने के निर्देश दिए हैं। अधिशासी अभियंता ने बताया कि वर्तमान में 2 गुणा 3 फीट का शिलापट्ट बन रहा है। स्थान की कमी से सभी माननीयों के नाम स्पष्ट अंकित नहीं हो पाते। इसके संबंध में शासन से सुझाव मांगा जाएगा। शिलापट्ट का आकार बढ़ाने का प्रस्ताव होगा।