मेरठ। बुधवार को चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के ऊर्दू विभाग में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि स्टूडेंट्स को यह बताने की ज़रूरत नहीं है कि उर्दू का फिल्मों से बहुत गहरा रिश्ता है। भाषा किसी की जागीर नहीं है। भाषा को कोई भी पढ़ और लिख सकता है। उर्दू भाषा की प्रसिद्धी ने फिल्मों को इज्ज़त दिलाई और यह भाषा लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हुई। कई शायर भी उर्दू में लिखे गानों से काफी पॉपुलर हुए। उर्दू की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अगर लफ़्ज़ समझ में न आए, तो भी यह लोगों को अपनी ओर ज़रूर खींचती है। कार्यक्रम में डॉ. असलम सिद्दीकी, फरहत अख्तर, मुहम्मद शमशाद, सईद अहमद सहारनपुरी, मुहम्मद नदीम, ईसा राना उपस्थित रहे।