बरेली में 17 साल पहले वर्ष 2008 में रामगंगा नदी किनारे बने तटबंध में सैकड़ों किसानों की जमीन चली गई, लेकिन उन्हें मुआवजा आज तक नहीं मिल पाया है। मुआवजा के लिए वह आज भी दर-दर भटक रहे हैं। सोमवार को बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता ने उन्हें समस्या निस्तारित करने के लिए बुलाया भी, लेकिन खुद कार्यालय से गायब रहे। पांच घंटे इंतजार के बाद किसान मायूस होकर लौट गए।
25 से अधिक संख्या में आए किसानों में कुछ ऐसे भी थे जो अधिशासी अभियंता के बुलावे की खबर पाकर हरियाणा से आए थे। किसानों ने बताया कि उनकी जमीन तटबंध बनने के दौरान अधिग्रहित हो गई थी। इससे अधिकांश किसान भूमिहीन हो गए और अब वह मजदूरी करने को विवश हैं। जमीन अधिग्रहित होने के बाद उन्हें मुआवजा तक नहीं मिला है।
अधिशासी अभियंता नीरज कुमार लांबा ने फोन पर बातचीत के दौरान बताया कि संबंधित किसानों के मुआवजा बकाया होने के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। प्रार्थनापत्र मिले तब वह प्रकरण में कार्रवाई करें। उन्होंने बताया कि सोमवार को किसानों को बुलाया था, लेकिन कुछ कार्यवश वह बाहर हैं, इसलिए सहायक अभियंता अजीत कुमार ने किसानों की समस्या सुन ली है, अब किसानों के प्रार्थना पत्र के आधार पर अगली कार्रवाई करेंगे।