बरेली शहर की बेटी इकरा संघर्ष की भट्ठी में तपकर कुंदन बनीं और समाज के सामने मिसाल पेश की। कोहाड़ापीर की तंग गलियों में एक कमरे के छोटे से मकान में रहने वाली इकरा ने यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में 95.50 प्रतिशत अंक हासिल कर जिले की मेरिट सूची में पांचवां स्थान प्राप्त किया है। इकरा के पिता इल्यास मोटर मैकेनिक का काम कर बमुश्किल 500 रुपये प्रतिदिन कमा पाते हैं। उनकी मां कौसर जरी का काम कर परिवार को सहारा देती हैं। छोटे से घर में इकरा ने किताबों को ही अपनी दुनिया बनाकर यह साबित कर दिया कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता।