आयतुल्लाह सय्यद अली खामेनेई के चालिसवें पर अंजुमन अजाए हुसैन की तरफ से मजलिस का अयोजन निकामुद्दीनपुर इमामबाड़ा में किया गया, जिसका अगाज कारी मोहम्मद जुहैश्र रिजवी ने तेलावत से किया। मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना गुलाम हुसैन मट्टू ने कहा कि आयतुल्लाह खामनाई ने हमेशा यह पैगाम दिया कि कौमों की इज्जत सर झुकाने में नहीं, बल्कि सर उठा कर जीने में है। उनके खुत्बो और बयानों में अक्सर मजलूमों के हक की आवाज़ बुलंद होती थी। वह कहते थे कि इंसाफ के रास्ते पर चलना आसान नहीं, लेकिन यही रास्ता आखिरकार कामयाबी और इज्जत की मंजिल तक पहुंचाता है। मुफ्ती अरशद फारूकी ने कहा कि खामनाई की शख्सियत का एक अहम पहलू यह था कि उन्होंने सादगी और इबादत को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाए रखा। सियासत की ऊंचाइयों पर पहुंच कर भी उन्होंने अपने आप को अवाम से जुदा नहीं किया। डाॅ. जावेद अख्तर ने कहा कि मुश्किल हालात में उनका लहजा नर्म, लेकिन इरादा मजबूत रहता था। कार्यक्रम को मौलाना अबु जफर इस्लाही ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर मौलाना सैय्यद सुल्तान, मौलाना मोहम्मद मेंहदी, मौलाना मजाहिर हुसैन, मौलाना अहमद अब्बास, मौलाना इकबाल हैदर, मोहम्मद अब्बास आदि मौजदू रहे। संचालन जीशाल अली आजमी ने किया।