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VIDEO: चैती छठ पर निर्जला व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य

Pragati Chand Updated Wed, 25 Mar 2026 09:40 AM IST

चैती छठ पर मंगलवार को व्रतियों ने सरोवर तटों पर पहुंच कर अस्ताचल गामी सूर्य को अर्घ्य दिया। इसके पूर्व पूजा अर्चना की और पानी में खड़े होकर सूर्य के अस्त होने का इंतजार किया। इस दौरान सरोवर तटों पर कांच ही कांच के बहंगियां बहंगी लचकत जाए, मारबो से सुगवा धनुख से सुगा जइहे मुरछाए आदि की गीतों से गुंजायमान रहा। सूर्य उपासना का पर्व छठ वैसे तो हर महीने मनाया जाता है। कार्तिक और चैत्र माह में छठ का अधिक महत्व है। चैत माह में गर्मी होने के कारण अपेक्षा कृत कम लोग व्रत करते हैं। चार दिवसीय छठ की शुरूआत रविवार को नहाय खाय के साथ हुई थी। सोमवार को निराजल व्रतियों ने शाम के वक्त बखीर का भोग लगाया और 36 घंटे के उपवास की शुरूआत की। मंगलवार की सुबह से ही अर्घ्य की तैयारी शुरू हो गई। घरों में साफ सफाई के बाद अर्घ्य देने के लिए पकवान तैयार किए गए। वहीं अर्घ्य देने के लिए बाजार से फलों की खरीदारी की गई। दोपहर में अर्घ्य के लिए सूप और दउरी सजाई गई। उसमें पूजन सामग्री रखी गई। शाम के वक्त स्नान ध्यान के बाद व्रती पूरे परिवार के लोगों के साथ सरोवर तटों पर पहुंची। लोक गीत गाते हुए व्रती और परिवार के सदस्य नगर के मान सरोवर तालाब, दामोदरदास पोखरा, मालगोदाम पोखरा सहित अन्य सरोवर तटों पर पहुंचे। यहां व्रतियों ने कलश स्थापित किया। इसके बाद भगवान सूर्य की पूजा अर्चना की। इसके बाद कमर भर पानी में खडे़ होकर सूर्य के अस्त होने का इंतजार किया। जैसे ही सूर्यास्त होने लगा उन्हें अर्घ्य दिया गया। फल और पकवान की टोकरी हाथों में लेकर जल और दूध से अर्घ्य दिया गया। इस दौरान सरोवर तटों प र अर्घ्य देने वाले व्रतियों को देखने वालों की भीड़ जुटी। वहीं व्रतियों केा अर्घ्य दिलाने वालों की भी होड़ रही। पूजा कमेटियों ने अर्घ्य के लिए दूध, जल आदि की व्यवस्था की थी। अर्घ्य देने के बाद व्रती घरों को लौटे। बुधवार की सुबह उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देकर चार दिवसीय व्रत का पारण किया जाएगा।

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