अघोर पीठ के पीठाधीश्वर औघड़ कपाली बाबा ने कहा कि काशी की धार्मिक परंपराओं में मसाने की होली है। इसके बिना कोई सनातनी होली नहीं मनाता है। होलिका दहन के बाद ही हम होली मनाते हैं। होलिका की चिता से ही तो हम होली की शुरुआत करते हैं। जबकि अघोर परंपरा के अनुयायी भगवान शिव के उपासक होते हैं और वह चिता भस्म के साथ होली खेलते हैं। इसलिए इसे परंपरा से अलग नहीं कर सकते हैं।