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25 साल बाद इंसाफ! जेल से रिहा हुए आजाद खां, डकैती के मामले में हाईकोर्ट ने किया बरी

video Updated Thu, 22 Jan 2026 11:28 AM IST

डकैती के मामले में अपनी आधी ज़िंदगी जेल में बिताने के बाद मैनपुरी जिले के 45 वर्षीय आज़ाद ख़ां को आखिरकार दोषमुक्त करार दिया गया। कानूनी अड़चनों के चलते रिहाई में देरी जरूर हुई, लेकिन जेल प्रशासन और सामाजिक संस्था की मदद से बुधवार शाम उन्हें बरेली सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया।

मैनपुरी जिले के एलाऊ थाना क्षेत्र स्थित मोहल्ला ज्योति कटार निवासी आज़ाद ख़ां को वर्ष 2002 में मैनपुरी की विशेष अदालत ने डकैती और गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अदालत ने उन पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था, जिसे अदा न करने पर दो साल की अतिरिक्त सजा का प्रावधान था। इसके अलावा वर्ष 2001 में मैनपुरी के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (कोर्ट नंबर चार) ने आर्म्स एक्ट और जानलेवा हमले के मामले में आज़ाद को दस वर्ष की सजा और सात हजार रुपये जुर्माना लगाया था। जुर्माना न भरने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भी निर्धारित की गई थी।

सजा के बाद आज़ाद पहले फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में बंद रहे और वर्ष 2003 में उन्हें बरेली सेंट्रल जेल स्थानांतरित किया गया। इस दौरान आज़ाद की ओर से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील दायर की गई। उच्च न्यायालय ने साक्ष्य और चश्मदीद गवाहों के अभाव में 19 दिसंबर 2025 को डकैती के मामले में आज़ाद को दोषमुक्त कर दिया। आर्म्स एक्ट और जानलेवा हमले की सजा वह पहले ही पूरी कर चुके थे।

उच्च न्यायालय ने दोषमुक्ति के साथ जमानत दाखिल करने का आदेश भी दिया, लेकिन मैनपुरी न्यायालय में औपचारिक प्रक्रिया पूरी न होने के कारण रिहाई आदेश समय पर जारी नहीं हो सका। मामला चर्चा में आने के बाद बरेली सेंट्रल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक अविनाश गौतम ने मैनपुरी के विशेष न्यायाधीश को पत्र लिखकर रिहाई आदेश उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। इसके बाद जेलर नीरज कुमार और मैनपुरी जेल प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित हुआ और ई-मेल के जरिए रिहाई परवाना बरेली सेंट्रल जेल भेजा गया।

जेलर नीरज कुमार के अनुसार, आज़ाद के भाई मस्तान ने जेल पहुंचकर 20 हजार रुपये का निजी बंधपत्र भरा। शेष सात हजार रुपये के जुर्माने की राशि सामाजिक संस्था ‘छोटी सी आशा’ और जेल कर्मियों ने आपसी सहयोग से जुटाकर जमा कराई। बुधवार रात करीब नौ बजे आज़ाद ने जेल की सलाखों से बाहर कदम रखा और 25 साल बाद खुली हवा में सांस ली। इसके बाद वह अपने भाई के साथ घर के लिए रवाना हो गए।

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