बलिया जिले में सामाजिक कार्यकर्ता और आकाश फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने सोमवार को जिलाधिकारी को पत्रक सौंपा। जिसमें उन्होंने निजी स्कूलों और प्रकाशन के बीच चल रहे कमीशन के खेल को रोकने की मांग की। पत्रक में उल्लेख किया है कि नियम के मुताबिक स्कूलों को एनसीईआरटी या एससीईआरटी की मानक पुस्तकें लागू करनी चाहिए, लेकिन कमीशन के लालच में अभिभावकों पर निजी प्रशासन की महंगी किताबें थोपी जा रही है। पत्रक में कहा है कि इन किताबों की बिक्री पर स्कूलों को 60% तक कमीशन मिलता है। यही कारण है कि प्री-प्राइमरी की किताबों का सेट भी 4000 से 6000 तक पहुंच गया है। पत्र में कहा है कि निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी की तुलना में 8 से 10 गुना अधिक महंगी है जो मध्यमवर्गीय परिवारों की कमर तोड़ रही है। शासन के आदेश के बावजूद निजी स्कूलों में जानबूझकर निजी प्रकाश का पाठ्यक्रम लागू किया गया है। स्कूल प्रबंधन अभिभावकों पर विशेष दुकानों से ही किताबें और स्टेशनरी खरीदने का दबाव बनाता है जो पूरी तरह गैरकानूनी है। उन्होंने मांग किया कि जनपद के सभी निजी विद्यालयों की जांच के लिए विशेष टीम गठित की जाए। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। अभिभावकों को किसी भी दुकान से पुस्तक खरीदने की पूर्ण स्वतंत्रता सुनिश्चित की जाए।पत्रक सौंपने वालों में प्रेम वर्मा, विशाल कुमार, दिलीप मौर्या, शैलेश वर्मा, संदीप साहनी, सूरज कुमार, सूबेदार वर्मा आदि रहे।