ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और किसानों को आधुनिक टेक्नोलॉजी से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई ड्रोन दीदी योजना क्षेत्र में फिलहाल परवान नहीं चढ़ सकी है। तीन साल पहले खंदौली, फतेहाबाद, बाह क्षेत्र की तीन महिलाओं को खेतों में उर्वरक और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन दिए गए थे, ताकि वे रोजगार के साथ अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें। लेकिन धरातल पर यह योजना पूरी तरह फ्लॉप साबित हुई। इस योजना के बंद होने की सबसे बड़ी वजह ड्रोन को लाने-ले जाने में होने वाला भारी-भरकम खर्च रहा। एक साधारण महिला के लिए रोजाना ड्रोन को खेत तक ले जाने में ही 1,000 से 1,500 रुपये खर्च हो जाते थे, जो एक आम महिला के बजट से बाहर था। इसके अलावा, तकनीकी खामियां भी बड़ी बाधा बनीं, ड्रोन की बैटरी की क्षमता बेहद कम थी और लिक्विड (कीटनाशक) ले जाने की क्षमता भी सीमित थी, जिससे बार-बार रीफिलिंग करनी पड़ती थी। हालांकि, छह महीने पहले इस योजना को दोबारा रफ्तार देने के लिए 10,15 नई ड्रोन दीदियों को ट्रेनिंग दी गई है, जिससे एक बार फिर उम्मीदें जागी हैं।