आगरा में दोहरे हत्याकांड के तीन दोषियों को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। तीनों कैदियों को फिलहाल जिला जेल की सामान्य बैरक में रखा गया है। इन पर तब तक नजर रखी जाएगी, जब तक फांसी की तारीख नहीं आ जाती। हालांकि जिला जेल में पूर्व में 35 कैदियों को फांसी दी जा चुकी हैं। वर्ष 1991 में आखिरी बार जुम्मन को फांसी दी गई थी। उसे बच्ची की हत्या के केस में दोषी पाया गया था। वह बुलंदशहर का रहने वाला था। मगर फांसी घर की बात करें तो इसका सिर्फ जर्जर ढांचा ही बचा है। जल्लाद की भी तैनाती नहीं है।