बाराबंकी में शहर का बस स्टेशन स्टेशन, मंगलवार सुबह करीब 11:00 बजे....मकर संक्रांति का पर्व होने के कारण सरकारी दफ्तरों व स्कूलों में छुट्टी होने के कारण भीड़ तो कम थी मगर फिर भी लोग यहां बसों के इंतजार में भटकते नजर आए। बस स्टेशन परिसर में चार पांच बसें मौजूद थी मगर जिन रूट की यह बसें थी उनमें यात्री नहीं थेm और जहां यात्री जाने थे उस रूट के लिए बसें नहीं थी। सीतापुर के महेश समेत कई यात्री ने बताया कि वह बिसवां जाना चाहते हैं मगर बस नहीं मिल सकी है, इंतजार कर रहे हैं। ठीक इसी तरह फतेहपुर और देवा जाने वालों के लिए बसों की कमी नजर आई। बेलहरा जाने के लिए खड़े रामू और सर्वेश ने बताया कि खिचड़ी के त्योहार पर लखनऊ से घर जा रहे हैं। एक घंटे से बस नहीं मिली है। बस स्टेशन पर बैठने के ठीक इंतजार ना होने के कारण यात्री परिसर में ही जमीन पर बैठकर या खड़े होकर बसों का इंतजार करते देखे गए। देवा जाने के लिए बस अड्डे के पास ही ऑटो रिक्शा लगे थे। जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण बस स्टेशन पर गंदगी का माहौल दिखा। महाकुंभ के प्रचार वाली होर्डिंग के ठीक बगल मल मूत्र पड़ा नजर आया। कूड़े के देर तो आम बात थी। बस स्टेशन के बाद अमर उजाला टीम रेलवे स्टेशन पहुंची। इस समय रेलवे स्टेशन का निर्माण अमृत भारत योजना के तहत चल रहा है। इसलिए आधे से अधिक भवन ढहा दिया गया है। ऐसी स्थिति में यात्री तो दूर अधिकारियों को बैठने के लिए जगह नहीं मिल रही है। खासकर ठंड के इस मौसम में महिलाएं और बच्चे ठिठुरते नजर आए। अलाव की कोई व्यवस्था रेलवे स्टेशन पर नहीं दिखी। इस बीच यहां पान और गुटखा खाकर थूके जाने पूरे स्टेशन में गंदगी का माहौल दिखा। ट्रेन विलंबित होने से यात्री उनके इंतजार में परेशान दिखे। शौचालय की कोई व्यवस्था स्टेशन परिसर में नहीं देखी। बाहर जरूर सुलभ कांप्लेक्स में 10 या 5 रुपए लेकर सुविधा दी जा रही थी। कुल मिलाकर बस और रेलवे स्टेशन की पड़ताल में यात्री सुविधाओं का अभाव दिखा जिसको सुधारने की जरूरत है।