कांच का केबिन, हरा पर्दा, चलताऊ वेंटिलेटर और आईसीयू तैयार...स्वास्थ्य विभाग की जांच में जिले के 40 अस्पतालों में आईसीयू मानकविहीन मिले। इनमें पर्याप्त जीवनरक्षक उपकरण और विशेषज्ञ नहीं थे। तीन अस्पतालों के पास आईसीयू की अनुमति भी नहीं थी। ऐसे अस्पताल संचालक इलाज के नाम पर मरीजों की जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। विभाग ने अस्पताल संचालकों को नोटिस जारी किए हैं। स्वास्थ्य विभाग में 2025-30 के लिए 1,241 चिकित्सकीय संस्थान पंजीकृत हैं। इसमें 486 अस्पताल, 150 पैथोलॉजी लैब-डायग्नोस्टिक सेंटर और 605 क्लीनिक हैं। आईसीयू में मरीजों की मौत और इलाज में लापरवाही की शिकायतें मिलने पर बीते दिनों 15 टीमों ने 40 अस्पतालों में जांच की। जांच के दौरान आईसीयू में भारी कमियां मिलीं। वेंटिलेटर की हालत खराब थी। बाइपैप मशीन, सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम नहीं था। मौके पर विशेषज्ञ डॉक्टर के स्थान पर कर्मचारी इलाज करते मिले। 12 अस्पतालों में स्वीकृति से अधिक बेड थे, जिन्हें तत्काल हटाया गया। डॉक्टरों के नाम, सेवा शुल्क का बोर्ड नहीं मिला। मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की स्थिति भी ठीक नहीं थी। दो बेडों के बीच में तय स्थान नहीं था। चिकित्सक के चैंबर और प्रवेश द्वार पर सीसीटीवी कैमरे नहीं थे।