एसएन मेडिकल कॉलेज में किडनी ट्रांसप्लांट सेवा जल्द शुरू होने वाली है। डीजीएमई (डायरेक्टर जनरल मेडिकल एजुकेशन), लखनऊ से अनुमति मिलने के बाद अब जनवरी से मरीजों का पंजीकरण और मार्च 2026 से किडनी ट्रांसप्लांट शुरू किया जा सकेगा। यह सुविधा शुरू होने से आगरा मंडल और आसपास के जिलों के किडनी मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि सुपर स्पेशलिटी किडनी विभाग में मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर पूरी तरह तैयार कर लिया गया है, जिसमें ट्रांसप्लांट से जुड़ी सभी अत्याधुनिक मशीनें और उपकरण स्थापित कर दिए गए हैं। किडनी ट्रांसप्लांट के लिए कॉलेज ने सितंबर में डीजीएमई को आवेदन किया था, जिसके बाद डीजीआई की टीम ने कॉलेज का निरीक्षण किया। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद मंगलवार को अनुमति पत्र प्राप्त हो गया। उन्होंने बताया कि एजीएमयू, लखनऊ की ओर से चार चिकित्सकों को किडनी ट्रांसप्लांट का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। जनवरी के पहले सप्ताह से मरीजों का पंजीकरण शुरू होगा, जबकि मार्च से ऑपरेशन किए जाएंगे। प्राचार्य ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना और असाध्य रोग योजना के तहत आने वाले मरीजों का किडनी ट्रांसप्लांट पूरी तरह नि:शुल्क किया जाएगा। अन्य मरीजों के लिए शुल्क केजीएमयू, लखनऊ के शुल्क के अनुसार तय किया जाएगा, जिसकी सूची वहां से मंगाई गई है। अब तक किडनी ट्रांसप्लांट के लिए मरीजों को दिल्ली, जयपुर या लखनऊ जाना पड़ता था, जिससे काफी समय और पैसा लगता था। यह सुविधा शुरू होने से यह बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा। एक ही भवन में जांच से लेकर सर्जरी तक सुविधा किडनी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अपूर्व जैन ने बताया कि सुपर स्पेशलिटी किडनी विभाग में एडवांस ऑपरेशन थिएटर तैयार किया गया है। यहां नि:शुल्क डायलिसिस की सुविधा पहले से मौजूद है और अब ट्रांसप्लांट सेवा शुरू होने से जांच, डायलिसिस और सर्जरी- तीनों सुविधाएं एक ही भवन में उपलब्ध होंगी। उन्होंने बताया कि किडनी से जुड़ी जांचों के लिए एक निजी कंपनी से समझौता किया जा रहा है, जिसकी प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके पूरा होते ही मरीजों को सभी जांच सुविधाएं भी यहीं उपलब्ध होंगी। 10 लाख तक का आता है खर्चा डॉ. अपूर्व ने बताया कि निजी अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट का खर्चा 10 लाख रुपये तक है। ऐसे में एसएन मेडिकल कॉलेज में यह सुविधा शुरू होने से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को काफी राहत मिलेगी।