बिहार के सिवान के रहने वाली राजमती अपना इलाज पीजीआई से करवा रही है। डेढ़ वर्ष पहले उनके पेट में एक सिस्ट था जिसका ऑपरेशन हुआ था। ऑपरेशन के बाद से वह लगातार पीजीआई आ रही हैं और अपना इलाज करवा रही हैं। जब भी वह आती हैं तो डॉक्टर उनकी एक बार फिर से जांच लिखता है और उस जांच को करवाने के लिए वह 15 -15 दिनों तक पीजीआई के अंदर फुटपाथ पर रहकर गुजारा करती हैं और अपनी जांच करवाती हैं। 2 जुलाई को पीजीआई पहुंची राजमती ने बताया कि उनके बेटे अर्जुन को भी पेट में कुछ दिक्कत हुई है तो अब उसका भी इलाज पीजीआई से ही चल रहा है। गरीबी से परेशान राजमती बताती है कि काफी दवाइयां उसे बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। कई बार डॉक्टर से मिन्नतें की तो डॉक्टर ने एक दो दवाई अंदर से दिला दिया लेकिन बेटे की दवाइयां अभी भी वह बाहर से ले रही हैं। यही नहीं जांच भी बाहर से कराकर लाने को कहा जाता है। शनिवार को उन्होंने अपना अल्ट्रासाउंड बाहर से कराया है। बाहर की जांच बहुत महंगी पड़ती है अब तक अपने इलाज में लाखों रुपए लोगों से मांग कर उधार लेकर लगा चुकी राजमती पीजीआई की व्यवस्था से नाखुश दिखाई पड़ी।