रायबरेली। जिले में कुत्ता और बंदरों का हमला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को जिला अस्पताल में 53 लोग कुत्ता के काटने के बाद एंटी-रेबीज वैक्सीन (एआरवी) की पहली डोज लगवाने के लिए पहुंचे। ओपीडी कक्ष से लेकर इंजेक्शन कक्ष में भी एआरवी लगवाने के लिए भीड़ रही। 100 से अधिक पुराने मरीजों को भी एआरवी लगाई गई। जिला अस्पताल में डॉ. सौरभ शर्मा की ओपीडी में चिकित्सीय सलाह लेने के बाद मरीजों को एआरवी लगवाई। राकेश (40), सीमा (35), सावित्री (28), सबनम (15), रामकेश (53), संजय (49), प्रिया (31), आर्यन (14), लकी (5), राम कुमार (5), दशरथ (12), अर्श (31) समेत 53 नए लोगों को एआरवी की पहली डोज दी गई। भीड़ अधिक होने के कारण इंजेक्शन कक्ष के बाहर मरीजों को इंतजार करना पड़ा। चिकित्सक डॉ. सौरभ शर्मा का कहना है कि रेबीज वायरल संक्रमण है। यह संक्रमित जानवरों के काटने से फैलता है। इसके लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और काटने वाली जगह पर झुनझुनी शामिल हैं। बीमारी बढ़ने पर दौरे, लकवा और अंततः मृत्यु हो सकती है। कुत्ते या किसी अन्य जानवर के काटने के बाद घर पर ही घाव को तुरंत साबुन और पानी से धोना चाहिए। इसके बाद बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क कर एआरवी की पूरी खुराक लेनी चाहिए। 72 घंटे में पहली डोज ले लेनी चाहिए।