फ्लोराइडयुक्त पानी जीवन का अभिशाप बन गया है। यह समस्या शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में है, लेकिन लालगंज, खीरों, सरेनी, सतांव में फ्लोराइड की समस्या सबसे ज्यादा है। यहां कई गांव ऐसे हैं, जहां हैंडपंप गल गए हैं। साथ ही ग्रामीणों को दिव्यांगता के साथ अन्य बीमारी का शिकार होकर इलाज करना पड़ रहाहै। इस समस्या से राहत दिलाने के लिए जल जीवन मिशन योजना शुरू की गई है, लेकिन इससे लोगों को राहत नहीं मिल पाई, क्योंकि अभी ज्यादातर गांवों में लगाई गई टोटियों से पानी नहीं टपका है। ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को शुद्ध पानी मिले, इसके लिए केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन योजना शुरू की है। योजना के तहत हर घर तक पानी पहुंचाने के लिया टोटियां लगाई जा रही हैं। तीन साल योजना शुरू हुए बीत गए, लेकिन ज्यादातर गांवों में अब तक पानी नहीं पहुंचा है। ऐसे में लोग हैंडपंप का पानी पी रहे हैं। खीरों ब्लॉक क्षेत्र में लोन नदी के किनारे बसे गांव कान्हामऊ , सिंघोर, मालपुर भोडरा, भितरी, बकुलिहा, महरानीगंज आदि गांव में पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। इसे पीने वाले लोग हड्डी व पेट की बीमारी से परेशान हैं। लोग कम उम्र में बूढ़े हो रहे हैं। गावों में इंडिया मार्का हैंडपंप लगवाए गए, लेकिन उनमें भी खारा पानी निकालने व फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। इसके चलते एक साल के अंदर ही नल की मशीन गल जाती है। कान्हामऊ, सिंघोर, बीजेमऊ, भितरी आदि गांवों में पानी की टंकी बनवाई। इसमें ज्यादातर खराब हो गईं हैं। कान्हामऊ निवासी गुलाब सिंह ने बताया कि फ्लोराइड युक्त पानी पीने से गांव के बुद्धीलाल चौरसिया व उनके भाई राम पियारे, कृष्ण दत्त दीक्षित, प्रेम शंकर लोधी उनकी पत्नी रामेश्वरी, गांव की रामकली, रामनारायण लोधी, राजकुमारी, राम नारायण यादव समेत 20 लोग कमर व पैर की हड्डी टेढ़ी होने से चलने फिरने में असमर्थ हैं। जलजीवन मिशन के तहत चार माह पूर्व डाली गई, पाइप लाइन में अभी तक पानी नहीं आया। इसी तरह सरेनी, ऊंचाहार, जगतपुर, सतांव क्षेत्र के लोग भी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। 675 गांवों में पहुंचाया जा चुका पानी अधिशासी अभियंता जल निगम एसएस रहमान का कहना है कि जल जीवन मिशन योजना के तहत 1563 गांवों में पानी पहुंचाया जाना है। इसमें अब तक 675 गांवों में पानी आपूर्ति हो रही है। शेष जगह काम चल रहा है। जल्द ही सभी गांवों में शुद्ध पानी पहुंचाया जाएगा।