ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर शुक्रवार को बागपत जिले भर में सुहागिन महिलाओं ने वट सावित्री व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की। परंपरा के अनुसार, महिलाएं बरगद (वट) के पेड़ की पूजा करती हैं जो हिंदू धर्म में त्रिदेव-ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना जाता है। गांव-शहर की महिलाएं, जैसे प्रिया, लक्ष्मी, पूजा, पिंकी आदि ने बताया कि वे हर वर्ष इस धार्मिक व्रत को श्रद्धा के साथ करती हैं। यह व्रत पौराणिक सावित्री-सत्यवान की कथा पर आधारित है, जिसमें देवी सावित्री ने यमराज से अपने पति का जीवन वापस पाया था। महिलाओं ने बताया कि व्रत के दिन वे सुबह से निराहार रहती हैं, बरगद की जड़ में जल, सिंदूर, रोली, मौली, फल-फूल अर्पित करती हैं, और वृक्ष की सावित्री-सत्यवान कथा सुनती हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को घर पर पकवान बनाकर व्रत खोला जाता है। यह पर्व न सिर्फ पति-पत्नी के रिश्ते की गहराई को दर्शाता है, बल्कि भारतीय नारी की आस्था, तप और श्रद्धा का प्रतीक भी है।