मानव को जीवन भर हर कदम पर अपने माता-पिता का सम्मान करना चाहिए। वे हमारे पहले गुरु होते हैं, जिनसे हमें जीवन की महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिलती हैं। ये बातें देवकी नंदन महाराज ने मंगलवार को मोतीझील मैदान पर विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में तीसरे दिन कही। उन्होंने कहा कि मानव जीवन का सबसे बड़ा धर्म दूसरों की मदद करना व उनकी भलाई के लिए काम करना है। हर व्यक्ति को अपने अंदर लोगों की मदद करने की भावना विकसित करनी चाहिए। धर्म केवल धार्मिक आचार-व्यवहार नहीं है, बल्कि हर क्षेत्र में सत्य, अहिंसा व नैतिकता का पालन करना है। देश पर पहला अधिकार सनातनियों का कथा के दौरान उन्होंने कहा कि हमारे देश पर पहला अधिकार सनातनियों का है। यह सनातन संस्कृति की जड़ों से जुड़ी बात है, जो प्राचीन भारत की सभ्यता व संस्कृति को जीवित रखती है। उन्होंने सनातन धर्म को बचाने के लिए एक मजबूत सनातन बोर्ड का गठन होना जरूरी बताया। कहा कि बोर्ड का उद्देश्य न केवल सनातन धर्म की रक्षा करना है, बल्कि उसे समय की धारा के साथ जोड़कर आगे बढ़ाना भी है।