भीतरगांव ब्लॉक स्थित ऐतिहासिक बरईगढ़ झील को उसके पुराने स्वरूप में लौटाने की दिशा में प्रशासन ने कदम बढ़ा दिए हैं। अस्तित्व के संकट से जूझ रही इस प्राकृतिक धरोहर की स्थिति को लेकर ‘अमर उजाला’ ने 27 मई के अंक में ‘ऐतिहासिक बरईगढ़ झील में नौतपा का कहर, अस्तित्व में संकट’ शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और शनिवार को अधिकारियों की टीम ने झील का स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जैन के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने सूखी पड़ी झील का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान झील को पुनर्जीवित करने के लिए संभावित उपायों पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने नहर से झील तक पानी पहुंचाने की संभावनाओं का परीक्षण किया और इसके लिए आवश्यक तकनीकी पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। अधिकारियों ने माना कि बरईगढ़ झील क्षेत्र की महत्वपूर्ण जल एवं पर्यावरणीय धरोहर है। इसके सूखने से आसपास के गांवों के किसानों, पशुपालकों और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। झील में पानी न रहने से प्रवासी पक्षियों का आगमन भी प्रभावित हुआ है।