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Video: गोंडा में दही बड़ा के साथ जिले की कचौड़ी को मिलेगी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान

Akash Dwivedi Updated Tue, 19 May 2026 04:56 PM IST

जिले के दही बड़ा के साथ ही कचौड़ी को भी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जाएगी। एक जनपद एक उत्पाद के तर्ज पर एक जनपद एक व्यंजन के तहत दही बड़ा के साथ ही कचौड़ी का चयन किया गया है। जिला उद्योग विभाग संबंधित कारीगरों को निशुल्क प्रशिक्षण के साथ ही पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग तक में जरूरी मदद करेगा। अधिकारियों ने बताया कि जिले के इटियाथोक का दही बड़ा न सिर्फ जिले के लोगों को बल्कि बाहर के लोग भी खाने के लिए आते हैं। मैदे या आटे की कचौड़ी भी लोगों को खूब भा रही है। गोंडा मुख्यालय से लेकर इटियाथोक समेत अन्य क्षेत्रों में कारीगर कचौड़ी को बनाते हैं। कचौड़ी के अंदर मसालेदार दाल, मटर या आलू की भराई की जाती है। फिर तेल में तला कर स्वादिष्ट बनाया जाता है। पारंपरिक होने के साथ ही लोग नाश्ते में खूब पसंद कर रहे हैं। जिला उद्योग उपायुक्त बाबूराम ने बताया कि गोंडा पहले अवध क्षेत्र के प्रभाव में रहा है। जहां मसालेदार और घी आधारित व्यंजन बहुत लोकप्रिय है। इसी परंपरा से खस्ता कचौड़ी का विकास हुआ है। गोंडा में कचौड़ी अपने विशिष्ट स्वाद व विशेष प्रकार के उड़द दाल एवं रेसिपी के कारण बिल्कुल अलग है। जोकि पारंपरिक अवसरों व त्योहारों पर घरों में इसे प्रमुख व्यंजन में बनाया जाता है। गोंडा की कचौड़ी में हींग, धनिया और दाल की भराई का पारंपरिक उपयोग स्थानीय कृषि और मसाला संस्कृति को दर्शाता है। 400 से अधिक श्रमिक कर रहे जीवनयापन अधिकारियों ने बताया कि जिले में जहां 100 से अधिक छोटी व बड़ी इकाइयां क्रियाशील हैं। वहीं, चार सौ से अधिक श्रमिक जीवन यापन कर रहे हैं। संपूर्ण वर्ष में कचौड़ी का स्वाद लिया जा सकता है। हालांकि कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, गुणवत्ता और स्वच्छता बनाए रखना, कम शेल्फ लाइफ, कुशल कारीगरों की कमी और प्रतिस्पर्धा अभी भी चुनौती बनी हुई है। जिले की बने पहचान, उत्पाद अपने आप में है खास केशव राम शुक्ल ने 1988 में थाने के पास छोटी सी दुकान खोलकर शुरुआत की थी। केशव राम शुक्ल ने बताया कि अब बेटा कृपा शंकर शुक्ल दुकान संभालता है। यहां दूध से ताजा दही तैयार किया जाता है, जिसका इस्तेमाल दुकान पर होता है, उड़द की दाल को अच्छी तरह धोकर और पीसकर दही बड़े बनाए जाते हैं। इन बड़ों की खास बात यह है कि इनके अंदर ड्राई फ्रूट्स डालकर बढ़िया स्वाद बना देते हैं। मसालों के साथ इसे ग्राहकों को परोसा जाता है। शिक्षक अनिल कुमार ने बताया कि इटियाथोक का दही बड़ा उन्हें बेहद पसंद आया है। वह अक्सर स्वाद का अनुभव किया करते हैं, परिवार के लोगों को भी काफी पसंद है।

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