केंद्र व राज्य सरकार एक तरफ 'जल जीवन मिशन' के तहत हर घर शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर जल निगम की लापरवाही के कारण टांडा कला गांव में हजारों लीटर पानी रोजाना सड़कों और खेतों में बहकर बर्बाद हो रहा है। स्थानीय गांव सभा में स्थापित वर्षों पुरानी जल निगम की टंकी से टांडा कला, सोनबरसा और टांडा खुर्द में जलापूर्ति की जाती रही है। हालांकि अब सोनबरसा और टांडा खुर्द में नई टंकियां चालू हो गई हैं, लेकिन टांडा कला में आज भी पुरानी लोहे की पाइपलाइन के सहारे ही सप्लाई दी जा रही है। जर्जर हो चुकी ये लोहे की पाइपें कई जगहों पर फट गई हैं।