बाराबंकी जिले में सड़क दुर्घटनाएं आम बात हो गई हैं लेकिन हादसे के शिकार लोगों को समय पर इलाज न मिलना और उनकी जान चली जाना व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है। सोमवार की रात ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला जिला अस्पताल में देखने को मिला। एक गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को एंबुलेंस द्वारा सड़क हादसे के बाद जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया था। उसकी पहचान न हो पाने के कारण उसे “लावारिस” समझकर स्ट्रेचर पर लिटा दिया गया। बस, औपचारिकता के तौर पर ग्लूकोज की बोतल टांग दी गई और डॉक्टरों ने कोई तत्काल उपचार शुरू नहीं किया। घायल की हालत इतनी नाजुक थी कि उसे तुरंत रेफर करने या प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर चिकित्सा सुविधा दिलाने की जरूरत थी लेकिन यह सब नहीं हुआ। करीब दो घंटे तक वह जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बिना समुचित इलाज के पड़ा रहा। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में “गोल्डन आवर” यानी पहले एक घंटे में उपचार मिलना मरीज की जान बचाने के लिए बेहद अहम होता है लेकिन बाराबंकी जिला अस्पताल में यह सिद्धांत शायद कागजों तक ही सीमित रह गया है।