बाराबंकी जिला अपनी पहचान कई रूपों में रखता है। लेकिन अब इस जिले की पहचान में एक नाम और पूरे गर्व के साथ जुड़ चुका है...चंद्रकला का। जी हां चंद्रकला एक कस्बे या बाजार तक सीमित मिठाई नहीं, बल्कि पूरे बाराबंकी जिले की मिठास बन चुकी है। जो हर तहसील, हर कस्बे और हर बाजार तक पहुंच चुका है। जिले के अलग-अलग इलाकों में मिठाई की दुकानों पर अगर सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला नाम है, तो वह चंद्रकला है। मसौली, सफदरगंज, हैदरगढ़, रामनगर, नवाबगंज से लेकर देवा और त्रिवेदीगंज तक—चंद्रकला आज पूरे जिले में पहचानी और पसंद की जा रही है। मसौली कस्बा इसका बड़ा केंद्र जरूर है, लेकिन इसकी खुशबू और मांग पूरे जनपद में फैली हुई है। चंद्रकला की खासियत उसके स्वाद में है। मैदा की परत में भरा खोया, काजू, बादाम, पिस्ता और इलायची, और फिर चाशनी में डूबी हुई वह मिठास—जो खाते ही पहचान बन जाती है। यही वजह है कि बाराबंकी जिले से गुजरने वाला हर मुसाफिर इसे अपने साथ ले जाना चाहता है। डिब्बा पैक चंद्रकला अब जिले की पहचान का हिस्सा बन चुकी है। अब इस पारंपरिक मिठास को सरकार की भी आधिकारिक पहचान मिल चुकी है। प्रदेश सरकार ने ‘एक जनपद–एक व्यंजन’ योजना के तहत चंद्रकला को बाराबंकी जिले का ब्रांड घोषित किया है। यह फैसला सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि पूरे जिले के मिठाई कारोबारियों, कारीगरों और स्थानीय पहचान के लिए सम्मान की तरह देखा जा रहा है। इस ब्रांड टैग से चंद्रकला को राज्य, राष्ट्रीय और आगे चलकर वैश्विक स्तर पर पहचान मिलने की संभावना है। जिले के कारोबारियों को नए बाजार मिलेंगे, मांग बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। चंद्रकला अब सिर्फ मिठाई नहीं रही, बल्कि बाराबंकी जिले का प्रतिनिधि स्वाद बन चुकी है।