शब-ए-बरात का पर्व बड़े ही अक़ीदत व एहतिराम के साथ मनाया गया। लोगों ने सारी रात खानकाहों और मस्जिदों में अल्लाह की इबादत की और अपने मरहूम अजीजों की कब्रों पर फातिहा पढ़ उनके लिए मग़फ़िरत की दुआएं कीं। औलिया अल्लाह की मज़ारों पर भी हाज़िरी देकर फातिहा पढ़ी। गुरुवार को कस्बे में मुस्लिम समुदाय ने शब-ए बरात का पर्व बहुत ही अकीदत और एहतराम से मनाया। खास अहमियत वाला पर्व शब-ए-बरात में शब का मतलब रात और बरात का मतलब निजात है। यानी ये रात गुनाहों से निजात वाली रात है। इसमें अल्लाह अपने बंदों की महफिरत फरमाता है।