कहा कि समुद्र मंथन के बाद निकले अमृत कुंभ (कलश) को लेकर जब देवताओं और असुरों में युद्ध शुरू हुआ तो भगवान विष्णु ने नारी का ही रूप धारण किया था। इसलिए कुंभ की शुरुआत ही नारी के साथ हुई है। कहा कि महिलाएं अपने को किसी भी क्षेत्र में कम न समझें। जो काम पुरुष नहीं कर सकते उस कार्य को करने के लिए भगवान ने नारी को धरती पर भेजा है। आपको नारी होने पर गर्व होना चाहिए।