प्रियंका ने साबित कर दिया कि अगर ठान लिया जाए तो हर मंजिल हासिल की जा सकती है। प्रियंका की आंखों की रोशनी उस वक्त गई थी, जब वह कक्षा छह में थी। ब्रेन ट्यूमर के आपरेशन के बाद उसकी दुनिया में अंधेरा छा गया। पढ़ाई में मेधावी प्रियंका ने पूरी मेहनत के साथ आगे बढ़ने का प्रण लिया। सहारा बनी बड़ी बहन। बड़ी बहन बोल-बोलकर उसे पढ़ाने लगी। इसी तरह उसने पहले दसवीं की परीक्षा पास की और अब बारहवीं में 93 फीसदी अंक हासिल करके उन लोगों का मुंह बंद कर दिया जो कहते थे कि जब देख नहीं सकती तो पढ़ेगी कैसे।