बच्चों में सोशल मीडिया की लत लगने का बड़ा कारण उनसे रील बनवाना है। रील बनाने के बाद उनमें लाइक, शेयर और सब्सक्राइब देखने की जिज्ञासा बनी रहती है। वे बार-बार फोन चेक करते हैं और कम लाइक मिलने पर बेचैन होते हैं। इससे उनकी पढ़ाई-लिखाई भी प्रभावित हो रही है। मनोचिकित्सकों का कहना है कि अभिभावक बच्चों को रील बनाने की आदत न लगने दें। न ही खुद उनसे रील बनवाएं। मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के निदेशक प्रो. दिनेश राठौर ने बताया कि बच्चों से रील बनवाना या उनकी रील बनाने का चलन तेजी से बढ़ा है। परिजन रील बनाने के बाद सोशल मीडिया पर उसे शेयर करते हैं। शुरुआत में यह शौक लगता है लेकिन फिर इसकी लत लग जाती है। रील को कितने लाइक मिले, कितनों ने शेयर किया, इसके लिए बच्चे बार-बार फोन देखते हैं। लाइक-शेयर कम होने और दूसरों की रील ज्यादा पसंद किए जाने पर उनमें बेचैनी होने लगती है। लंबे समय के बाद इससे बच्चों की पढ़ाई और अन्य काम प्रभावित होते हैं। वह हर वक्त यही सोचते हैं कि क्या रील बनाई जाए। इससे उनके व्यवहार में भी बदलाव आता है। ऐसी परेशानी वाले 20-25 मामले हर माह ओपीडी में आते हैं। मानसिक स्वास्थ्य संस्थान का हेल्पलाइन नंबर 14416 है।