TISS में बनेगा स्कूल ऑफ एनालिटिक्स: रतन टाटा के नाम पर रखने की तैयारी; क्या बदलेंगे तकनीकी शिक्षा के मायने?
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने टाटा ट्रस्ट्स के साथ मिलकर स्कूल ऑफ एनालिटिक्स स्थापित करने की घोषणा की है। संस्थान की योजना इसका नाम दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा के नाम पर रखने की है। यहां एनालिटिक्स में स्नातक और परास्नातक कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। पढ़ाई में तकनीक के साथ समाज और पर्यावरण को भी जोड़ा जाएगा। सवाल है कि यह नया स्कूल छात्रों और शोध के लिए कितना बड़ा अवसर बनेगा? आइए,सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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विस्तार
मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज यानी टीआईएसएस ने तकनीक, समाज और टिकाऊ विकास को जोड़ने वाली एक नई पहल की घोषणा की है। संस्थान ने टाटा ट्रस्ट्स के सहयोग से स्कूल ऑफ एनालिटिक्स स्थापित करने का फैसला किया है। टीआईएसएस की योजना इस स्कूल का नाम दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा के नाम पर रखने की है। संस्थान के मुताबिक, यह उनके नैतिक तकनीक, नवाचार और टिकाऊ विकास के प्रति लंबे समय तक रहे योगदान को सम्मान देने की कोशिश है।
रतन टाटा के नाम पर क्यों रखा जाएगा स्कूल?
टीआईएसएस के अनुसार रतन टाटा तकनीक और नवाचार के इस्तेमाल को समाज के हित से जोड़ने के पक्षधर रहे। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए नए स्कूल का नाम उनके नाम पर रखने की योजना बनाई गई है। स्कूल का फोकस केवल तकनीकी शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। यहां छात्रों को तकनीक के साथ सामाजिक चुनौतियों और टिकाऊ विकास को समझने की क्षमता भी दी जाएगी। इसका उद्देश्य ऐसे विद्यार्थी तैयार करना है जो तकनीक को समाज की जरूरतों से जोड़ सकें।
स्कूल में कौन-कौन से पाठ्यक्रम होंगे?
नए स्कूल में फिलहाल दो अकादमिक कार्यक्रम शुरू करने की योजना है। इनमें एनालिटिक्स में मास्टर डिग्री और एनालिटिक्स एवं सस्टेनेबिलिटी में बैचलर डिग्री शामिल है। पाठ्यक्रमों में छात्रों को तकनीकी जानकारी के साथ सामाजिक नजरिए को समझने पर भी जोर दिया जाएगा। यानी विद्यार्थियों को आंकड़ों और तकनीक का इस्तेमाल करना सिखाने के साथ यह भी बताया जाएगा कि इनका असर समाज और पर्यावरण पर कैसे पड़ता है।
क्या यह सिर्फ पढ़ाई तक सीमित रहेगा?
टीआईएसएस की योजना स्कूल ऑफ एनालिटिक्स को आगे चलकर राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर शोध और ज्ञान का केंद्र बनाने की है। यहां अलग-अलग विषयों को जोड़कर शोध करने, नीतियों पर सलाह देने और विशेषज्ञों की क्षमता बढ़ाने से जुड़े काम किए जाएंगे। इसका उद्देश्य तकनीक और समाज से जुड़े जटिल मुद्दों पर शोध को बढ़ावा देना है। इससे छात्रों को अकादमिक पढ़ाई के साथ व्यावहारिक समस्याओं को समझने का अवसर भी मिल सकता है।
किन क्षेत्रों पर होगा खास फोकस?
नए स्कूल में आगे चलकर कार्यरत लोगों के लिए विशेष शिक्षा कार्यक्रम शुरू करने की भी योजना है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग की तैयारी है। डिजिटल बदलाव, जलवायु से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण और शहरी अनौपचारिक क्षेत्र जैसे विषयों पर काम किया जाएगा। इन क्षेत्रों में तकनीक और आंकड़ों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में स्कूल का उद्देश्य तकनीकी विशेषज्ञता को सामाजिक और पर्यावरणीय जरूरतों से जोड़ना होगा।
रतन टाटा की विरासत को कैसे आगे बढ़ाएगा स्कूल?
स्कूल ऑफ एनालिटिक्स का प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब तकनीक और आंकड़ों का इस्तेमाल शिक्षा, कारोबार, पर्यावरण और नीतियां बनाने में तेजी से बढ़ रहा है। टीआईएसएस का कहना है कि रतन टाटा के नाम पर इस स्कूल की स्थापना उनके नवाचार, नैतिक तकनीक और टिकाऊ विकास से जुड़े विचारों को आगे बढ़ाने की दिशा में होगी। अगर योजना के मुताबिक इसका विकास होता है तो यह छात्रों, शोधकर्ताओं और नीति से जुड़े लोगों के लिए तकनीक और समाज को एक साथ समझने का नया मंच बन सकता है।