जलालपुर-पारा फ्लाईओवर की जद में 87 मकान और दुकानें हैं, जो फ्लाईओवर के रूट में पड़ रहे हैं, मगर इनके मालिकों को अब तक मुआवजा नहीं मिल सका है। सेतु निगम की टीम दिसंबर 2024 में ही इन सभी की जमीन की रजिस्ट्री लेकर गई थी। सात माह गुजर चुके, मगर किसी को एक धेला नहीं दिया गया। 153 करोड़ रुपये की लागत वाला जलालपुर-पारा फ्लाईओवर अफसरों की जल्दबाजी, मनमानी और सुस्ती का उदाहरण है। फ्लाईओवर का प्रोजेक्ट बना दिया गया, काम भी शुरू हो गया, मगर इसे जिस रास्ते से गुजराना है, वहां जमीन का अधिग्रहण किया ही नहीं गया। जब इसका 25 फीसदी काम पूरा हुआ तो इस पुल की जद में आने वाले जलालपुर-पारा के लोगों ने विरोध कर दिया, जिससे काम ठप हो गया। अब निर्माण ठप हैं, मगर सेतु निगम के अफसर प्रभावितों के मुआवजे का इंतजाम और जमीन का अधिग्रहण तक नहीं कर सके हैं।