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बुद्ध की तपोस्थली में गंध कुटी को फूलों से सजाकर अनुयायियों ने की प्रार्थना

भूपेन्द्र सिंह Updated Fri, 11 Jul 2025 06:30 PM IST

बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती अनुयायियों से गुलजार है। गुरु पूर्णिमा से आयोजित हुए वर्षावास पूजन में शामिल होने शुक्रवार को श्रीलंका व वियतनाम से अनुयायियों का दल श्रावस्ती पहुंचा। दल के सदस्यों ने गंध कुटी पर भिक्षु विमल तिस्स के नेतृत्व में प्रार्थना की। इस दौरान अनुयायियों ने भिक्षु विमल तिस्स के नेतृत्व में गंध कुटी को फूलों से सजाकर विश्व शांति की कामना की। इस दौरान भिक्षु विमल तिस्स ने कहा कि तपोस्थली स्थित गंधकुटी को भगवान बुद्ध के श्रावस्ती आगमन पर सेठ सुदत्त (अनाथपिंडक) की ओर से निर्मित कराया गया था। यह स्थान बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। निर्माण के समय यह चंदन की लकड़ी का बना सात मंजिला विहार था। इसका भगवान बुद्ध आवास के रूप में प्रयोग करते थे। भगवान बुद्ध यहीं अपने शिष्यों को उपदेश देते थे। चंदन निर्मित होने के कारण इस स्थान से आने वाली विशेष खुशबू के कारण ही इसे गंधकुटी नाम दिया गया। सातवीं शताब्दी में भारत भ्रमण पर आए चीनी यात्री फाह्यान ने भी अपनी यात्रा वृतांत में इसका उल्लेख करते हुए इसे दो मंजिला स्थान बताया था। ह्वेनसांग को यहां ईंट निर्मित भवन के भग्नावशेष मात्र ही दिखे। उपेक्षा का शिकार होते-होते यह स्थान खंडहर में तब्दील हो गया। इसे मौर्य काल, गुप्त काल और कुषाण काल में समय-समय पर पुनर्निर्मित कराया गया। इस दौरान मौजूद अनुयायियों ने बुद्धम शरणम गच्छामि धम्मम शरणम गच्छामि का उद्घोष किया।

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