गंगा सप्तमी पर गंगा का किनारा मां गंगा के जयकारों और मंत्रों से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं ने मां गंगा को आरपार की माला और 72 साड़ियां अर्पित कीं। चुनरी यात्रा में ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के साथ श्रद्धालुओं ने मां गंगे के जयकारे के उद्घोष के बीच दशाश्वमेध घाट तक मां गंगा के प्रकट होने की स्मृति को जीवंत कर दिया।