चैत्र के पावन नवरात्रि के अवसर पर वाराणसी के पवित्र गंगा तट पर स्थित गायघाट एक बार फिर भक्ति के रंग में सराबोर हो उठा। यहां विराजमान माता मुखनिर्मलिका गौरी के दर्शन और पूजन के लिए भोर से ही भक्तों का तांता लगा रहा। जय-जय कार... के गूंजते स्वरों के बीच श्रद्धालु हाथों में नारियल, चुनरी और मिष्ठान लिए माता के चरणों में पहुंचे। माता को भेंट चढ़ाने के बाद भक्तों ने शीश नवाया और अपने परिवार के सुख, समृद्धि व शांति की कामना की। मंदिर के पुजारी उमाशंकर ने बताया कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। चैत्र नवरात्रि में माता मुखनिर्मलिका गौरी के रूप में पूजी जाती हैं। उन्होंने कहा कि माता के दर्शन और पूजन से परिवार में सुख-शांति का वास होता है। लोग निरोग रहते हैं। माता बड़ी दयालु हैं और सभी की रक्षा करती हैं।