राम चलत अति भयउ बिषादू। सुनि न जाइ पुर आरत नादू॥ कुसगुन लंक अवध अति सोकू। हरष बिषाद बिबस सुरलोकू...।। यानी श्री रामजी के चलते ही बड़ा भारी विषाद हो गया। नगर का आर्तनाद (हाहाकर) सुना नहीं जाता। लंका में बुरे शकुन होने लगे, अयोध्या में अत्यंत शोक छा गया और देवलोक में सब हर्ष और विषाद दोनों के वश में गए। रामनगर की रामलीला में सोमवार को हुई बारिश के बाद भी श्रद्धालु लीला देखने के लिए छाता लगाकर डटे रहे।