फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

धार्मिक संवेदनाओं को सहेजते हैं 'अर्पण कलश'

Aman Vishwakarma Updated Sat, 02 May 2026 01:23 PM IST

गंगा घाटों और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए कूड़ेदान का उपयोग अत्यंत आवश्यक है। गंगाजी में धार्मिक निर्माल्य कचरा, प्लास्टिक और पूजन सामग्री विसर्जित करने से तो अच्छा यही है कि हम धार्मिक निर्माल्य के लिए अर्पण कलश का इस्तेमाल करें और अन्य कचरे को घाटों पर स्थापित डस्टबिन में ही डालें। यदि हम कचरे का उचित निस्तारण करते हैं तो जल प्रदूषण कम होता है और एक स्वस्थ और टिकाऊ वातावरण का निर्माण होता है। गंगा सेवक राजेश शुक्ला का आप सभी से यही आग्रह है कि प्लास्टिक के थैले, पानी की बोतलें और रैपर सीधे नदी में न फेंकें। इस्तेमाल की गई पूजा सामग्री (निर्माल्या), फूल, और मालाएं गंगा में विसर्जित न करें, इन्हें निर्धारित अर्पण कलश में डालें। गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग कूड़ेदान में डालने से उनका पुनर्चक्रण (Recycling) आसान होता है। गंगा घाटों पर हर कुछ दूरी पर डस्टबिन उपलब्ध हैं, उनका उपयोग करें।

Latest

विज्ञापन

Recommended

विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें