गंगा घाटों और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए कूड़ेदान का उपयोग अत्यंत आवश्यक है। गंगाजी में धार्मिक निर्माल्य कचरा, प्लास्टिक और पूजन सामग्री विसर्जित करने से तो अच्छा यही है कि हम धार्मिक निर्माल्य के लिए अर्पण कलश का इस्तेमाल करें और अन्य कचरे को घाटों पर स्थापित डस्टबिन में ही डालें। यदि हम कचरे का उचित निस्तारण करते हैं तो जल प्रदूषण कम होता है और एक स्वस्थ और टिकाऊ वातावरण का निर्माण होता है। गंगा सेवक राजेश शुक्ला का आप सभी से यही आग्रह है कि प्लास्टिक के थैले, पानी की बोतलें और रैपर सीधे नदी में न फेंकें। इस्तेमाल की गई पूजा सामग्री (निर्माल्या), फूल, और मालाएं गंगा में विसर्जित न करें, इन्हें निर्धारित अर्पण कलश में डालें। गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग कूड़ेदान में डालने से उनका पुनर्चक्रण (Recycling) आसान होता है। गंगा घाटों पर हर कुछ दूरी पर डस्टबिन उपलब्ध हैं, उनका उपयोग करें।