मनरेगा को बचाए रखने और प्रस्तावित ‘विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ बिल का विरोध करते हुए संयुक्त वाम दलों के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष धरना दिया। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भाकपा (माले) और भाकपा (मार्क्सवादी) के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से भागीदारी निभाते हुए केंद्र सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया। नेताओं ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण खेत मजदूरों के लिए ऐतिहासिक योजना रही है। इससे करोड़ों मजदूरों को काम की गारंटी मिली। नए प्रस्तावित कानून में बजट की व्यवस्था बदलकर योजना के अस्तित्व पर खतरा पैदा कर दिया गया है। इससे मजदूरों की आजीविका प्रभावित होगी। इसी के विरुद्ध आवाज बुलंद करते हुए आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई। धरने में नए बिल को वापस लेने, मनरेगा को यथावत जारी रखने, पूर्व बजट प्रणाली बहाल करने, मजदूरों को 200 दिन काम और 600 रुपये दैनिक मजदूरी देने, 55 वर्ष से अधिक आयु के मजदूरों के लिए पेंशन, सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसी मांगें रखी गईं। प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन एडीएम को सौंपा गया। अध्यक्षता शिवमूर्ति कुशवाहा, प्रेमनाथ और बसावन गुप्ता ने संयुक्त रूप से किया। संचालन भाकपा जिला सचिव आरके शर्मा ने किया। इस मौके पर नंदलाल आर्य, सुरेश कोल, बच्चालाल, देवकुमार विश्वकर्मा, बाबूलाल भारती, राजबली, अमरनाथ बिंद आदि मौजूद रहे।