महाबोधि विहार बोधगया में चल रहे मुक्ति आंदोलन के समर्थन में सोमवार को संयुक्त बुद्धिष्ट संगठन के नेतृत्व में बौद्ध अनुयायियों ने जुलूस निकाल प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट गेट से नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट परिसर तक मार्च निकाला। राष्ट्रपति को संबाेधित ज्ञापन सौंपा। कार्यक्रम संयोजक सुमंत सिंह मौर्य एवं डॉ. भागीरथी सिंह मौर्य ने कहा कि बिहार सरकार ने 6 जुलाई 1949 को बोधगया टेंपल एक्ट (बीटी एक्ट) लागू कर महाबोधि बुद्ध विहार, बोधगया के प्रबंधन में दूसरे समुदाय को शामिल कर दिया। इससे बौद्ध विरासत को गंभीर नुकसान हो रहा है। महाबोधि विहार, बोधगया न केवल भारत, बल्कि दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों का पवित्र तीर्थस्थल है। बीटी एक्ट लागू होने के बाद इस परिसर में अतिक्रमण बढ़ गया है। इससे बौद्ध समाज की धार्मिक आस्था और मान्यताओं को ठेस पहुंच रही है। आदित्य मौर्य और समृद्धि कुशवाहा ने महाबोधि विहार का प्रबंधन पूरी तरह से बौद्ध भिक्षुओं को सौंपने की मांग की। प्रदर्शन में संतोष कुमार पटेल, श्रीपति विश्वकर्मा, अशोक कुमार कन्नौजिया, किरन सिंह कुशवाहा, विजयमल मौर्य, इंदु मौर्य, डॉ. शिवशंकर राव, मंगला प्रसाद मौर्य, अनिल कुमार, राकेश कुमार मौर्य, लक्ष्मण सिंह आदि शामिल रहे। संचालन रविरंजन शाक्य ने किया।