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VIDEO: Raebareli: धान की रोपाई से पहले साढ़े सात लाख अन्नदाताओं पर मुसीबत की मार

ishwar ashish Updated Wed, 25 Jun 2025 07:33 PM IST

खरीफ की फसलों की बोवाई से पहले ही जिले के साढ़े सात लाख अन्नदाताओं पर मुसीबत की मार है। वजह 160 साधन सहकारी समितियों और 1200 निजी दुकानों पर यूरिया, डीएपी संकट है। ऐसे में किसान न तो धान की रोपाई कर पा रहे हैं और न ही अन्य फसलों की बोवाई। इक्का-दुक्का स्थानों पर खाद है भी तो किसानों की तादाद ज्यादा होने पर उर्वरक मिल पाएगी, इसकी कोई गारंटी भी नहीं है। थोक विक्रेताओं के पास खाद है, लेकिन वह ज्यादा रेट पर निजी दुकानदारों खाद बिक्री करना चाहते हैं। ऐसे में निजी दुकानदार थोक विक्रेताओं से खाद खरीदने में किनारा कर रहे हैं। सतांव के एक निजी दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एक बोरी डीएपी की कीमत 1350 रुपये है। थोक विक्रेता 1430 रुपये में दे रहे हैं। ऐसे में हम खाद खरीद भी लें, लेकिन किसान महंगे रेट पर खाद नहीं लेगा। ऊपर से उनके खिलाफ कार्रवाई भी हो जाएगी। शिवगढ़ प्रतिनिधि के मुताबिक साधन सहकारी समितियों में खाद नहीं है। इससे लोग परेशान हैं। नसीराबाद प्रतिनिधि के मुताबिक साधन सहकारी समितियों और प्राइवेट दुकानों पर खाद की किल्लत से किसान परेशान हैं कि धान की रोपाई कैसे होगी। जिले में कृषि विभाग का खाद की उपलब्धता का दावा खाद उपलब्धता (मीट्रिक टन में) यूरिया 29656.705 डीएपी 4994.50 पोटाश 1200.700 एनपीके 6850.25 खरीफ की फसलों का आच्छादन फसल का नाम लक्ष्य पूर्ति धान की नर्सरी 10782 10692 धान की फसल 161730 25207 मक्का 815 308 ज्वार 1667 0 बाजरा 78 0 उड़द 4458 0 मूंग 342 0 अरहर 1647 0 मूंगफली 145 24 तिल 6424 0 नोट - लक्ष्य और पूर्ति हेक्टेयर क्षेत्रफल में है।

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