मऊ कलेक्ट्रेट पर सोमवार को भाकपा(माले) और इंकलाबी नौजवान सभा के कार्यकर्ताओं ने यूजीसी गाइडलाइन को लागू करने की मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही राष्ट्रपति को संबोधित पांच सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा प्रदर्शन के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए भाकपा(माले) के नेता रामनवल ने कहा कि यूजीसी नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में व्याप्त जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ एक आवश्यक और संवैधानिक व्यवस्था है। इन नियमों को कमजोर करने की कोशिश सामाजिक न्याय और समानता के मूल सिद्धांतों पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि रोहित वेमुला और डॉ. पायल तड़वी जैसी घटनाएं यह साबित करती हैं कि शैक्षणिक संस्थानों में भेदभाव आज भी मौजूद है।इंकलाबी मजदूर केंद्र के नेता रामजी सिंह ने कहा कि यूजीसी के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति-आधारित भेदभाव की शिकायतों में 118 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ऐसे में इक्विटी नियमों को कमजोर करने के बजाय उन्हें और सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। इंकलाबी नौजवान सभा के जिला संयोजक जीतेन्द्र राजभर ने कहा कि यूजीसी इक्विटी नियम युवाओं, दलित-पिछड़े और वंचित तबकों के छात्रों के लिए सुरक्षा कवच है।प्रदर्शन में वीरेंद्र कुमार श्रीराम सिंह, बसंत कुमार, प्रसेन,ओम प्रकाश शिवबली,दिव्य कुमार सिंह,इकबाल अहमद,रमाकांत,मुंशी,राम शबद,बलई राजभर,जेपी यादव मुनेश्वर, अब्दुल करीम, साधु यादव, राजकुमार, दीपक कुमार,अरविंद, चेतन, विद्याधर, चंद्रशेखर चौहान, प्रदुमन यादव, रामबदन,शकील बेलाली, लाल बहादुर उपस्थित रहे।