बौद्ध भिक्षुओं और अनुयायियों के लिए पवित्र हिरण्यवती नदी बुद्ध की धरती कुशीनगर में अपवित्र हो गई है। जबकि इसका जल बौद्ध काल में पवित्र था, बुद्ध ने इस नदी का पानी पीकर महापरिनिर्वाण को प्राप्त किया था। यह घटना ही नदी के पानी की पवित्रता की पुष्टि करता है। यही, नहीं नदी के मार्ग परिवर्तन से रामाभार झील का भी निर्माण हुआ था। अब यह स्थल रामाभार स्तूप के रूप में है।