शास्त्रों में सत शब्द से ईश्वर का निरूपण किया गया है। ईश्वर का अंश होते हुए भी जीव माया के आवरण के कारण अपनी नित्यता, चेतना और आनंद का अनुभव नहीं कर पाता। संत का उद्देश्य इसी आवरण को हटाकर जीव को ईश्वर से मिलाना है। यह बातें बुधवार को सिविल लाइंस स्थित मर्चेंट चैंबर हॉल में रामकथा सुनाते हुए सातवें दिन मंदाकिनी दीदी ने कही।