तपेश्वरी मंदिर में माता के दर्शन के लिए सोमवार को भक्त उमड़े। 54 वर्षों से मंदिर में सेवा कर रहे पुजारी शिव मंगल ने बताया कि तपेश्वरी देवी को सीता माता का स्वरूप माना जाता है। माता सीता ने पुत्र लव-कुश का मुंडन और छेदन संस्कार भी यही पर कराया था। नवरात्र में जिन भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं वह मंदिर परिसर में मन्नत के दीपक (अखंड ज्योति) जलाते है। जो पूरे नवरात्र जलते रहते हैं। इस बार करीब 500 दीपक जलाए गए हैं। मंदिर में मां तपेश्वरी के साथ लक्ष्मी जी, दुर्गा जी, सरस्वती जी व पार्वती जी विराजमान हैं। सुबह चार बजे से रात 12 बजे तक खुला रहता है।