नौशाद की हत्या के बाद सोमवार की देर शाम उसका शव गांव पहुंचा। परिवार के लोग देर रात को मिट्टी का रस्म पूरा कर बहू के किए कृत्य से से सदमें में हैं। मंगलवार को 100 वर्षीय बुजुर्ग पिता अपने परिवार के सदस्यों के साथ गुमशुम बैठे थे। आपस में चर्चा हो रही थी कि काश नौशाद परिवार के सदस्यों की बात मान लिया होता तो शायद ये दिन देखने को नहीं मिला होता।