अगर होली के अलग-अलग और बहुत ही अनोखे रंग देखने हैं तो बाराबंकी चले आइए। यहां आपको जहां देवा शरीफ स्थित सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की मजार पर एक साथ हिंदू मुस्लिम और सभी धर्म के लोग होली खेलते मिल जाएंगे। वहीं, शहर के धनोखर चौराहे पर पूरा शहर होली खेलने के लिए उमड़ता दिखाई पड़ेगा क्या महिलाएं, क्या बुजुर्ग,, क्या बच्चे सभी एक साथ जब रंगों की बौछार में नाचते झूमते हैं तो ऐसा दृश्य उत्पन्न होता है मानो वातावरण कह रहा हो कि अवध में होली खेले रघुवीरा...। बाराबंकी की होली की एक और सबसे खास बात है कि यहां पर परंपरा और आस्था का मिश्रण मनोविज्ञान में मिलता है जिससे हजारों लोगों की बीमारियां ठीक हो जाती है। सुनने में जरूर अजीब लगता हो मगर हरख ब्लॉक के तीरगांव में हर होलिका दहन के दिन आसपास के जिले से हजारों लोगों की भीड़ इकट्ठा होती है यह लोग खासकर मिर्गी की बीमारी को दूर करने के लिए होली की आग तापने आते हैं। गुलामाबाद और कोटवा धाम की होली भी इसीलिए प्रसिद्ध है। तो आईए देखते हैं बाराबंकी की होली के कुछ दृश्य।