साहब, एक साल पहले आज ही के दिन मेरी बच्ची परवीन को टीबी खा गई थी। इतना कहते ही मोहम्मद यूनुस का गला रुंध जाता है। कहते हैं, पहले निजी डाॅक्टरों से और फिर सरकारी अस्पताल में बेटी का इलाज कराया। सरकारी अस्पताल में दवाएं न मिलने पर बाजार से महंगी-महंगी दवाएं खरीदीं, मगर बेटी को नहीं बचा पाया।