एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन की जिला इकाई ने सोमवार को प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा। इसमें कृषि आदान व्यापार से जुड़े खुदरा विक्रेताओं की ज्वलंत समस्याओं के समाधान की पुरजोर मांग की गई है। संगठन जिलाध्यक्ष विजय कुमार शुक्ल के नेतृत्व में यह ज्ञापन सौंपा गया। एसोसिएशन ने स्थानीय समस्याओं और व्यापारियों के हितों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। कृषि आदान व्यापार से जुड़े खुदरा विक्रेताओं को वर्तमान में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन चुनौतियों में उर्वरकों के परिवहन का भारी बोझ और कई वर्षों से स्थिर डीलर मार्जिन प्रमुख हैं। एसोसिएशन ने इन समस्याओं को कृषि आपूर्ति श्रृंखला के लिए बाधक बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि कृषि आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है। व्यापारियों के अस्तित्व को बचाने के लिए भी इन समस्याओं का शीघ्र समाधान अनिवार्य है। इस अवसर पर जिला महामंत्री राम किशोर त्रिवेदी, जिला उपाध्यक्ष राम किंकर त्रिपाठी सहित कई पदाधिकारी और व्यापारी उपस्थित रहे। एसोसिएशन ने सरकार के समक्ष मुख्य रूप से उर्वरक की डोर-स्टेप डिलीवरी की मांग रखी है। यूरिया, डीएपी, एनपीके और एमओपी सहित सभी उर्वरकों की डिलीवरी सीधे खुदरा विक्रेता की दुकान तक सुनिश्चित की जाए। वर्तमान में परिवहन का भारी बोझ छोटे दुकानदारों को आर्थिक रूप से कमजोर कर रहा है। बढ़ती महंगाई, दुकान के किराए और बिजली बिलों को देखते हुए डीलर मार्जिन में तत्काल वृद्धि की आवश्यकता है। यह मार्जिन पिछले कई वर्षों से स्थिर पड़ा है। कीटनाशक दवाओं के नमूने फेल होने की स्थिति में केवल खुदरा विक्रेता को दोषी न माना जाए। चूंकि विक्रेता सीलबंद उत्पाद बेचते हैं, अतः खराब गुणवत्ता के लिए पूर्ण जवाबदेही निर्माता कंपनी की तय होनी चाहिए। छोटे खुदरा बीज विक्रेताओं को साथी पोर्टल की तकनीकी जटिलताओं से मुक्त रखा जाए। एसोसिएशन का मानना है कि इसकी अनिवार्यता केवल विनिर्माण कंपनियों तक सीमित होनी चाहिए। इससे 'व्यापार सुगमता' का लक्ष्य पूरा हो सकेगा।